आसनसोल : राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शुमार मैथन जलाशय इस वर्ष क्रिसमस के दिन अपेक्षित रौनक से वंचित नजर आया। हर साल 25 दिसंबर को जहां सैलानियों और पिकनिक मनाने वालों की भारी भीड़ उमड़ती थी, वहीं इस बार पर्यटकों की संख्या में स्पष्ट गिरावट देखने को मिली। जलाशय पहुंचे पर्यटकों ने सुविधाओं की कमी, अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता को इसका प्रमुख कारण बताया।

पर्यटकों का कहना है कि मैथन में प्रवेश के नाम पर भारी शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन इसके बदले बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पिकनिक स्पॉट पर साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, जबकि कूड़ा फेंकने के लिए डस्टबिन की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। कई स्थानों पर दुर्गंध और गंदगी के कारण लोगों को बैठने तक में परेशानी हुई।
स्थानीय पर्यटकों के अलावा झारखंड, बंगाल और आसपास के जिलों से आए सैलानियों ने भी आवारा कुत्तों और मवेशियों के खुलेआम घूमने पर चिंता जताई। बच्चों और परिवार के साथ आए लोगों का कहना है कि ऐसे माहौल में पिकनिक का आनंद फीका पड़ जाता है। कई पर्यटकों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को मोटी प्रवेश राशि मिल रही है, तो उसके रखरखाव में यह लापरवाही क्यों?

सुरक्षा के मोर्चे पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं दिखी। जलाशय में नौका विहार करते समय कई पर्यटक बिना लाइफ जैकेट के नावों में बैठे नजर आए। यह दृश्य चिंताजनक रहा, क्योंकि पानी में जरा सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है। नाव चालकों का कहना है कि वे लाइफ जैकेट उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कई पर्यटक स्वयं इसे पहनने से बचते हैं। इसके बावजूद, सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू न किया जाना प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।
पर्यटकों की घटती संख्या का असर स्थानीय कारोबारियों पर भी साफ दिखा। होटल, चाय-नाश्ते की दुकानें और नाव संचालन से जुड़े लोग इस बार कम आमदनी से मायूस नजर आए। व्यवसायियों का कहना है कि अव्यवस्था और नकारात्मक छवि के कारण लोग मैथन आने से कतराने लगे हैं।

हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की सक्रियता जरूर दिखी। मैथन थर्ड डाइक क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही थी। लाउडस्पीकर से लगातार घोषणाएं कर पर्यटकों को सावधान किया जा रहा था। ई-रिक्शा के माध्यम से भी पिकनिक स्थलों पर माइकिंग कर नियमों की जानकारी दी जा रही थी। इसके बावजूद प्लास्टिक और थर्मोकोल के उपयोग पर रोक प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकी।
पर्यटकों की मांग है कि मैथन जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल को लेकर प्रशासन गंभीरता दिखाए। साफ-सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में यह स्थल फिर से सैलानियों की पहली पसंद बन सके।















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