आसनसोल : गुरुवार को सिख इतिहास के स्वर्णिम और त्यागपूर्ण अध्याय को स्मरण करते हुए गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबज़ादों की शहादत दिवस के अवसर पर आसनसोल शहर श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के रंग में रंग गया। इस अवसर पर आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से पारंपरिक मर्यादा और आध्यात्मिक गरिमा के साथ भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

नगर कीर्तन की शुरुआत प्रातः गुरु नानक गुरुद्वारा, मुर्गा सोल से हुई। पंच प्यारों के नेतृत्व में निकली यह शोभायात्रा जीटी रोड से होती हुई गुरु नानक कम्युनिटी हॉल, रामबंधु पहुँची। पूरे मार्ग पर “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष गूंजते रहे। वातावरण गुरुबाणी, शबद कीर्तन और धार्मिक उल्लास से पूरी तरह सराबोर नजर आया।
नगर कीर्तन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। पारंपरिक सिख वेशभूषा में सजी संगत ने अनुशासन, सेवा और एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। जगह-जगह संगत द्वारा शरबत और प्रसाद की सेवा की गई, वहीं श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया। धार्मिक ध्वज ‘निशान साहिब’ के साथ चल रही संगत ने साहिबज़ादों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि गुरु नानक कम्युनिटी हॉल में इस अवसर पर तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 27 दिसंबर को मुख्य दीवान आयोजित कर साहिबज़ादों की शहादत दिवस को श्रद्धा और स्मरण के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान कथा-कीर्तन, अरदास और सामूहिक संगत का आयोजन होगा।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबज़ादों का बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। अल्पायु में अत्याचार के सामने झुकने से इनकार कर उन्होंने धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका जीवन संदेश देता है कि अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़ा होना ही सच्ची आस्था है।
गुरुवार को आयोजित इस नगर कीर्तन ने आसनसोल में सामाजिक सौहार्द, धार्मिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को और मजबूत किया। राजनीति और भेदभाव से परे, साहिबज़ादों की शहादत का यह स्मरण कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों को साहस, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता नजर आया।















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