बर्नपुर : सेल इस्को स्टील प्लांट (आईएसपी) में प्रस्तावित 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक की महत्वाकांक्षी आधुनिकीकरण एवं विस्तार परियोजना अब जमीन पर आकार लेती दिख रही है। 4.08 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ चल रही इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में पुराने प्लांट के कई विभागों और कार्यालयों का स्थानांतरण किया जा रहा है, वहीं अतिक्रमण की गई जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

आईएसपी प्रबंधन ने बर्नपुर रोड स्थित स्कोब गेट से लेकर निमतल्ला तक सड़क के दोनों ओर फैले अतिक्रमण पर सख्ती दिखाते हुए दुकानदारों और अस्थायी निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी किया है। कंपनी की ओर से सड़क किनारे स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर अतिक्रमण निषेध का संदेश अंकित है। इसके साथ ही दुकानों, गैरेज और अन्य अस्थायी ढांचों पर दस दिनों के भीतर स्थान खाली करने के निर्देश वाले नोटिस चिपकाए गए।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद इलाके में असमंजस और भय का माहौल बन गया है। कुछ लोगों ने नोटिस को गंभीरता से लिया, तो कुछ ने इसे अनदेखा करते हुए फाड़कर फेंक दिया। इसके बावजूद आईएसपी की जमीन पर कब्जा जमाकर बैठे दुकानदारों में हड़कंप साफ नजर आ रहा है। कंपनी द्वारा दिए गए समय में से एक सप्ताह बीत चुका है और अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले दस वर्षों से अस्थायी ढांचे बनाकर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। अचानक दुकान हटाए जाने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा। कुछ दुकानदारों ने भावुक स्वर में कहा कि दुकान टूटने के बाद उनके पास भीख मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि जमीन कंपनी की है और आवश्यकता पड़ने पर वे हटने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ समय और वैकल्पिक व्यवस्था की दरकार है।

निमतल्ला क्षेत्र के पास सड़क किनारे स्थिति और भी गंभीर है। यहां कंपनी की जमीन पर बीते कुछ वर्षों में आधा दर्जन से अधिक कार वाशिंग सेंटर, कार रिपेयरिंग यूनिट, कई गैरेज और नर्सरियां संचालित हो रही हैं। ये सभी इकाइयां आईएसपी की जमीन पर अतिक्रमण कर चल रही हैं, जिससे विस्तार परियोजना के लिए जगह खाली कराना प्रबंधन के लिए अनिवार्य हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, आईएसपी प्रबंधन नए वर्ष की शुरुआत में, जनवरी के पहले सप्ताह से अतिक्रमण हटाओ अभियान को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इस दौरान प्रशासन और सुरक्षा बलों की मदद से सड़क किनारे बने सभी अवैध ढांचों को हटाया जा सकता है।
एक ओर जहां यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खोलने वाली मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से सड़क किनारे व्यापार कर रहे छोटे दुकानदारों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी और प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कितना संतुलित और मानवीय रुख अपनाते हैं।















Users Today : 37
Users Yesterday : 23