आसनसोल : राज्यव्यापी आंदोलन के आह्वान के तहत पिछले कई दिनों से जारी आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल शुक्रवार को आसनसोल में और अधिक उग्र रूप में सामने आई। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शामिल एचएलजी मोड़ पर आशा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सड़क पर उतरते हुए पथ अवरोध किया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। नारों की गूंज और हाथों में तख्तियां लिए आशा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश खुलकर जाहिर किया।

प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों और सुविधाओं की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका आरोप है कि बार-बार ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों से मिलने के प्रयास के बावजूद उनकी समस्याओं को अनसुना किया गया। इसी उपेक्षा के कारण उन्हें मजबूरन हड़ताल और सड़क जाम जैसे कदम उठाने पड़े हैं।

आशा कार्यकर्ताओं ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के मंत्री फिरहाद हाकिम से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि जब संवाद के सभी रास्ते बंद हो जाएं, तब आंदोलन ही आखिरी विकल्प बचता है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह अपने हक और सम्मान के लिए किया जा रहा संघर्ष है।
इस दौरान आंदोलन के बीच मानवता और संवेदनशीलता की एक मिसाल भी देखने को मिली। एचएलजी मोड़ पर ड्यूटी में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी अचानक अस्वस्थ होकर गिर पड़ीं। यह दृश्य देखते ही प्रदर्शन कर रही आशा कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध स्थगित कर तुरंत उनकी सहायता की। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इन कर्मियों ने प्राथमिक उपचार देकर पुलिसकर्मी की हालत को संभाला। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आंदोलन के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं के भीतर सेवा और करुणा की भावना जीवित है।

सड़क जाम के कारण एचएलजी मोड़ और उससे जुड़े इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूल बसें और आम राहगीर घंटों जाम में फंसे रहे। लोगों को वैकल्पिक रास्तों से निकलने में काफी परेशानी हुई। बाद में पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया गया।

आशा कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। उनका कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगी, जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता। फिलहाल, शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं की अनदेखी कहीं बड़े सामाजिक संकट का कारण न बन जाए।















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