जामुड़िया : जामुड़िया औद्योगिक अंचल शनिवार को उस समय सनसनी और तनाव के माहौल में आ गया, जब एक निजी कारखाने के भीतर कामकाज को लेकर हुआ विवाद खुली हिंसा में तब्दील हो गया। इस घटना में कारखाने के एक सुपरवाइजर को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले ने औद्योगिक क्षेत्र में श्रम सुरक्षा, ठेका प्रथा और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना जामुड़िया थाना क्षेत्र के जादुडागा स्थित बीएसटी कारखाने की बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम कारखाने में काम के दौरान सुपरवाइजर संजय चार और ठेकेदार मिथुन माजी के बीच किसी कार्य को लेकर तीखी बहस हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शुरुआत में यह विवाद केवल मौखिक था, लेकिन देखते ही देखते मामला उग्र हो गया और हाथापाई में बदल गया।
पीड़ित सुपरवाइजर संजय चार ने पुलिस को दिए गए बयान में आरोप लगाया है कि ठेकेदार मिथुन माजी ने उन्हें काम रोकने का निर्देश दिया था। जब उन्होंने इसका विरोध किया और नियमों के तहत काम जारी रखने की बात कही, तो ठेकेदार आपा खो बैठा। आरोप है कि इसके बाद मिथुन माजी ने अपने आधा दर्जन साथियों को बुलाया और सभी ने मिलकर कारखाने परिसर में ही संजय चार पर लाठी-डंडों और घूंसे से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से सुपरवाइजर जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद कारखाने में अफरा-तफरी मच गई। अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह बीच-बचाव कर घायल सुपरवाइजर को हमलावरों से छुड़ाया और उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार, संजय चार को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
इस बीच, मारपीट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें कारखाने के भीतर झड़प और पिटाई के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं।

शनिवार सुबह पीड़ित की ओर से जामुड़िया थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना सूत्रों के अनुसार, आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। घटना के बाद से मुख्य आरोपी ठेकेदार मिथुन माजी फरार बताया जा रहा है। पुलिस द्वारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला।
स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं औद्योगिक क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हैं। ठेकेदारों और सुपरवाइजरों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियों की कमी, दबाव में काम और सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर ऐसे टकराव को जन्म देती है। मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि कारखानों में श्रम विवादों के समाधान के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल पूरे जादुडागा औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस की नजर बनी हुई है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।















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