आसनसोल : मंगलवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन से सटे बाजार क्षेत्र में दुकानदारों और हाकरों का आक्रोश खुलकर सामने आया। रेलवे द्वारा सात दिनों के भीतर दुकानें खाली करने के निर्देश के खिलाफ स्थानीय व्यापारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए और नारेबाजी करते हुए दुकानदारों ने साफ कर दिया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के वे अपनी आजीविका छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले तीन दशकों से अधिक समय से इसी बाजार में दुकानें लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। अचानक सात दिन का नोटिस देकर दुकान खाली कराने का आदेश न केवल अमानवीय है, बल्कि हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला भी है। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि उन्हें हटाया जा रहा है, तो रेलवे या प्रशासन की ओर से पुनर्वास की ठोस योजना क्यों नहीं बताई जा रही।
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार हाल के दिनों में रेलवे के कुछ अधिकारी बाजार क्षेत्र में पहुंचे थे और स्पष्ट शब्दों में कहा था कि यह इलाका रेलवे की जमीन है और इसे खाली कराया जाएगा। हालांकि, जब व्यापारियों ने वैकल्पिक जगह या पुनर्वास की बात उठाई, तो अधिकारियों ने इस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसी अनिश्चितता और भय के माहौल ने व्यापारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग दुकानदार ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इसी बाजार में खपाई है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतें और बुजुर्गों का इलाज—सब कुछ इसी दुकान से चलता है। अगर अचानक दुकान छिन गई, तो उनके सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। हाकरों ने भी इसी तरह की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे रोज कमाकर रोज खाने वाले लोग हैं, उनके पास न तो बचत है और न ही कोई दूसरा विकल्प।

व्यापारियों और हाकरों ने एक सुर में मांग की कि रेलवे और जिला प्रशासन मिलकर पहले पुनर्वास की ठोस योजना बनाए। जब तक उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक वे दुकानें नहीं हटाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि उनकी बात अनसुनी की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए बर्नपुर स्टेशन के आसपास तनावपूर्ण माहौल बन गया। हालांकि, किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पुलिस बल भी एहतियात के तौर पर तैनात किया गया है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी व्यापारियों के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को उजाड़ना उचित नहीं है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यापारियों की समस्या का समाधान निकाला जाए, ताकि विकास और आजीविका के बीच संतुलन कायम रह सके।















Users Today : 36
Users Yesterday : 23