बर्नपुर : सोमवार को बर्नपुर में उस समय शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आ गया, जब सेल आईएसपी प्रबंधन द्वारा संचालित स्कूलों में नई छात्र भर्ती पर रोक लगाने का निर्णय सार्वजनिक हुआ। प्रबंधन की ओर से जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, सेल आईएसपी के अधीन चल रहे छह स्कूलों में अब किसी भी नए छात्र का नामांकन नहीं किया जाएगा। इस फैसले ने अभिभावकों, छात्रों और राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला अचानक लिया गया है और इससे सैकड़ों बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर उन अभिभावकों में असमंजस की स्थिति है, जो अपने बच्चों का दाखिला इन स्कूलों में कराने की तैयारी कर रहे थे। नोटिस जारी होते ही इलाके में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और शिक्षा व्यवस्था को लेकर आशंकाएं गहराने लगीं।
इस फैसले के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस नेता अशोक रूद्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे एक “सुनियोजित साजिश” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सेल आईएसपी प्रबंधन धीरे-धीरे अपने स्कूलों को बंद करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अशोक रूद्र का कहना है कि इससे पहले छोटा दिगारी स्कूल को बंद किया जा चुका है और अब उसी क्रम में शेष पांच स्कूलों को भी चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की तैयारी की जा रही है।
टीएमसी नेता ने तीखे शब्दों में कहा कि यह निर्णय न केवल छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है, बल्कि बर्नपुर और आसपास के इलाकों की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
उनका स्पष्ट कहना था कि “किसी भी कीमत पर स्कूलों को बंद नहीं होने दिया जाएगा। शिक्षा के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

सोमवार को इसी मुद्दे को लेकर बर्नपुर में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभिभावक, छात्र और स्थानीय लोग शामिल हुए। हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने सेल आईएसपी प्रबंधन के फैसले को वापस लेने की मांग की। नारेबाजी के दौरान यह आरोप भी लगाए गए कि शिक्षा को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है, जिससे आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
अभिभावकों का कहना है कि सेल आईएसपी द्वारा संचालित स्कूल लंबे समय से क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा का माध्यम रहे हैं। ऐसे में नई भर्ती पर रोक लगना बच्चों के विकल्प सीमित कर देगा और उन्हें महंगे निजी स्कूलों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
फिलहाल, सेल आईएसपी प्रबंधन की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत या स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, नोटिस के बाद पैदा हुए हालात ने बर्नपुर में शिक्षा और सामाजिक भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि अब प्रबंधन के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और प्रबंधन इस विरोध के बीच क्या रुख अपनाते हैं और क्या छात्रों व अभिभावकों को कोई राहत मिल पाती है या नहीं।















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