आसनसोल/कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के जरिए खड़ी की गई बेहिसाब संपत्ति को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। केंद्रीय एजेंसी की ताजा पड़ताल में यह संकेत मिले हैं कि राज्य में अलग-अलग घोटालों से जुटाई गई करोड़ों रुपये की काली कमाई को प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों के माध्यम से चुनिंदा व्यापारियों, उद्योगपतियों और कुछ अधिकारियों तक पहुंचाया गया। इस पूरे नेटवर्क ने बीते एक दशक में एक संगठित व्यवस्था का रूप ले लिया है।

ईडी सूत्रों के अनुसार, ऐसे करीब 25 बड़े कारोबारी, उद्योगपति और अधिकारी चिन्हित किए गए हैं, जिनकी राजनीतिक रसूखदारों से नजदीकी बताई जा रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन लोगों की संपत्ति में पिछले दस वर्षों के दौरान असामान्य रूप से लगभग 500 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि उनकी घोषित आय और कारोबार के आंकड़ों से मेल नहीं खाती, जिससे संदेह और गहरा गया है।
आयकर विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट और ईडी द्वारा दर्ज ईसीआईआर के आधार पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस धन का इस्तेमाल आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने में किया जा सकता है। इसी कड़ी में ईडी के एक उप-निदेशक के नेतृत्व में चार विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, संपत्ति खरीद और निवेश के मामलों की परत-दर-परत जांच कर रही हैं।
जांच का मुख्य फोकस शॉपिंग मॉल निर्माण, रियल एस्टेट परियोजनाओं और विदेशों में ट्रांसफर किए गए फंड पर है। हाल ही में एक बड़े शॉपिंग मॉल मालिक के ठिकानों पर 24 घंटे से अधिक समय तक चली तलाशी के दौरान भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अवैध लेन-देन के सबूत हाथ लगे हैं। इसके अलावा, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के परिजनों के बैंक खातों में भी संदिग्ध लेन-देन पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस बीच, कोयला तस्करी से जुड़े 2024-25 के एक पुराने मामले की नए सिरे से जांच शुरू होने के बाद 12 अन्य व्यापारियों और अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। इनमें कुछ स्थानीय प्रशासन से जुड़े चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। ईडी अधिकारियों का मानना है कि अवैध तरीके से अर्जित धन को इन व्यावसायिक संस्थानों और प्रोजेक्ट्स के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई।
गौरतलब है कि नवंबर महीने में ईडी ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में धनबाद से लेकर आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र और कोलकाता तक एक साथ छापेमारी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान सीमा क्षेत्रों में सक्रिय कोल-सैंड सिंडिकेट के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। अब एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि केके-एलबी नेक्सस से जुड़े पूरे तंत्र को उजागर करने की अंतिम तैयारी चल रही है।
ईडी की इस सक्रियता से राज्य की राजनीति और कारोबारी जगत में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा।















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