स्वदेशी संकल्प यात्रा में गूंजा स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रबोध

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आसनसोल :  स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में स्वदेशी जागरण मंच की ओर से ‘स्वदेशी संकल्प यात्रा’ का आयोजन किया गया। इस यात्रा में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर राष्ट्र, संस्कृति और स्वदेशी विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूरे क्षेत्र में यात्रा के दौरान राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण बना रहा।

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कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल उपस्थित रहीं। उन्होंने यात्रा में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत या विचारक नहीं थे, बल्कि वे भारत की आत्मा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का संदेश आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है, जब समाज को अपने मूल्यों और पहचान को लेकर आत्ममंथन की आवश्यकता है।

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अग्निमित्रा पाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद गर्व के साथ अपनी पहचान को स्वीकार करने की बात करते थे। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का स्पष्ट संदेश था—“गर्व से कहो कि हम हिंदू हैं।” लेकिन आज के समय में हिंदू समाज के भीतर वह आत्मगौरव और आत्मविश्वास कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जब देश और देश के बाहर हिंदुओं के साथ हिंसा और अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं, तब समाज का एक बड़ा वर्ग अपेक्षित रूप से आवाज नहीं उठाता।

विधायक ने विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जब पड़ोसी देशों या देश के अलग-अलग हिस्सों में धर्म के आधार पर हिंसा होती है, तो उस पर जिस तरह का व्यापक विरोध होना चाहिए, वह देखने को नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताकर चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन ऐसी चुप्पी वास्तव में समाज के प्रति जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने के समान है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चयनात्मक संवेदनशीलता आज की राजनीति और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन चुकी है। कुछ मुद्दों पर तुरंत सड़कों पर उतरने वाले लोग, जब अपने ही समाज के लोगों पर अत्याचार होता है, तब मौन धारण कर लेते हैं। यह दोहरा मापदंड समाज को कमजोर करता है और देश की एकता के लिए भी घातक है।

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स्वदेशी संकल्प यात्रा के दौरान वक्ताओं ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और युवाओं को आत्मनिर्भर तथा जागरूक बनाने पर भी जोर दिया। यात्रा में शामिल लोगों ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने और उन्हें अपने दैनिक जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

आयोजकों का कहना है कि इस तरह की यात्राओं का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में वैचारिक जागरण, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना है। स्वदेशी जागरण मंच ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भी इसी तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान जारी रहेगा।

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