रेलपार में डाकघर बंदी प्रस्ताव से नागरिकों में गहरा आक्रोश

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आसनसोल :  आसनसोल के रेलपार क्षेत्र स्थित डिपो पाड़ा गोपाल नगर पलाश बागान पोस्ट ऑफिस को बंद करने की कथित योजना के विरोध में स्थानीय नागरिकों का गुस्सा शुक्रवार को सड़कों पर फूट पड़ा। पोस्ट ऑफिस के सामने बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना असंतोष जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि यह डाकघर बंद किया गया, तो सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और पेंशनधारकों को झेलनी पड़ेगी।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पोस्ट ऑफिस पिछले करीब 50 वर्षों से इलाके के नागरिकों की सेवा करता आ रहा है। यहां बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक अपनी पेंशन प्राप्त करते हैं, बचत खाते संचालित करते हैं और रोजमर्रा के छोटे-छोटे वित्तीय काम निपटाते हैं। डाकघर के बंद होने या दूर स्थान पर स्थानांतरित किए जाने से उन्हें पैसों के लेन-देन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जो उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद कठिन होगा।

विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिकों ने आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों से परामर्श किए इस तरह का फैसला लिया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पोस्ट ऑफिस केवल एक सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि इलाके की जीवनरेखा है, जहां से बुजुर्गों को समय पर पेंशन और अन्य आवश्यक सेवाएं मिलती हैं। इसे बंद करना मानवीय दृष्टि से भी गलत कदम होगा।

इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता मलय मजूमदार ने कहा कि यह डाकघर आधी सदी से भी अधिक समय से जनता की सेवा कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसे बंद कर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना की बात सामने आई है, लेकिन इससे क्षेत्र के सैकड़ों खाताधारकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस फैसले से पेंशनधारक, मजदूर वर्ग और मध्यम वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

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मलय मजूमदार ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में इस पोस्ट ऑफिस को बंद नहीं होने दिया जाएगा। यदि प्रशासन ने जनता की मांगों की अनदेखी की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।

प्रदर्शन में रामा बागची, तापस मुखर्जी, प्रदीप बागची, सुब्रत दास सहित दर्जनों स्थानीय लोग मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में डाकघर को यथास्थान बनाए रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर यह डाकघर बंद हुआ, तो वे जिला स्तर तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से उम्मीद जताई है कि जनता की भावनाओं और जरूरतों को समझते हुए इस ऐतिहासिक पोस्ट ऑफिस को बंद करने का फैसला वापस लिया जाएगा, ताकि बुजुर्गों और आम लोगों को राहत मिल सके।

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