दुर्गापुर/आसनसोल : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन को लेकर सियासी तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है। गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने अयोग्य और संदिग्ध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दुर्गापुर अनुमंडल कार्यालय और पश्चिम बर्धमान जिला प्रशासन के मुख्यालय के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासनिक परिसरों के बाहर भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक एकत्रित हुए, जिससे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के बावजूद नागरिकों से ‘फॉर्म-7’ स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। यह फॉर्म मतदाता सूची में दर्ज ऐसे नामों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए होता है, जो मृत, स्थानांतरित या पात्रता से बाहर माने जाते हैं। पार्टी का दावा है कि इसी प्रक्रिया को बाधित कर मतदाता सूची को जानबूझकर संदिग्ध बनाए रखा जा रहा है।
दुर्गापुर में आयोजित धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की रीढ़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंडाल प्रखंड कार्यालय और दुर्गापुर क्षेत्र के प्रशासनिक कर्मचारी जानबूझकर फॉर्म-7 लेने से इनकार कर रहे हैं। तिवारी के अनुसार, यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयास है, ताकि फर्जी और अपात्र नाम सूची में बने रहें।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि कोई भी नागरिक आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनावी लाभ के लिए मतदाता सूची में गड़बड़ियों को संरक्षण दे रहा है और प्रशासन दबाव में काम कर रहा है।
इधर, पश्चिम बर्धमान जिला मुख्यालय के समक्ष हुए प्रदर्शन में जिला भाजपा अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य और पार्टी नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने भी तीखे स्वर अपनाए। उन्होंने दावा किया कि बीएलओ और सहायक निर्वाचन अधिकारी संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग के बजाय राज्य सरकार के संकेतों पर काम कर रहे हैं। नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया और कहा कि इससे निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा पर सीधा आघात होता है।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे। कई लोगों ने खुलकर यह शिकायत की कि उनके द्वारा लाए गए फॉर्म-7 को लेने से संबंधित अधिकारी बचते रहे या टालमटोल करते रहे। नागरिकों का कहना था कि यदि समय रहते आपत्तियां दर्ज नहीं होंगी, तो आगे चलकर मतदाता सूची में सुधार असंभव हो जाएगा।
भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही फॉर्म-7 स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। पार्टी ने राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा करते हुए संकेत दिया कि यह मुद्दा केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा। नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ी तो चुनाव आयोग और न्यायिक मंचों का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन भाजपा के इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी दिनों में मतदाता सूची का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े टकराव का रूप ले सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या मतदाता सूची सत्यापन की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ पाती है या नहीं।















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