चार माह की बकाया तनख्वाह को लेकर डीसीएल में उबाल

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दुर्गापुर :  शनिवार को पश्चिम बर्दवान जिले के दुर्गापुर स्थित दुर्गापुर केमिकल्स फैक्टरी (डीसीएल) परिसर में हालात बेहद तनावपूर्ण बने रहे। पिछले चार महीनों से वेतन न मिलने से नाराज अस्थायी कर्मियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। बकाया वेतन की मांग को लेकर मजदूरों ने फैक्टरी के मुख्य द्वार पर डेरा डाल रखा है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में असंतोष और चिंता का माहौल फैल गया है।

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जानकारी के अनुसार, डीसीएल में कार्यरत करीब 158 अस्थायी कर्मचारी बुधवार से ही फैक्टरी का मुख्य गेट जाम कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को भी यह आंदोलन जारी रहा, जिसमें मजदूरों के परिजन—महिलाएं और बच्चे—भी शामिल नजर आए। परिवारों की मौजूदगी ने आंदोलन को और भावनात्मक रूप दे दिया है। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर राज्य सरकार और फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

मजदूरों का कहना है कि वे नियमित रूप से फैक्टरी परिसर और संपत्ति की सुरक्षा का कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें पिछले चार महीनों से एक भी पैसा नहीं मिला। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन न मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। कई मजदूरों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, किराया और दवाइयों तक के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है।

शनिवार को हालात उस समय और बिगड़ गए, जब पुलिस ने गेट जाम हटाने की कोशिश की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मजदूरों ने पुलिस के सामने ही नारे तेज कर दिए और फैक्टरी गेट छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। कुछ देर के लिए माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि किसी अप्रिय घटना की आशंका बन गई।

इसी दौरान फैक्टरी परिसर में फंसी एक निजी कंपनी की गाड़ी को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इससे आक्रोशित मजदूरों का गुस्सा भड़क उठा। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के एक अधिकारी को घेर लिया और उसका पीछा किया। हालांकि, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद फैक्टरी के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

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गौरतलब है कि राज्य सरकार के अधीन दुर्गापुर केमिकल्स फैक्टरी का उत्पादन दिसंबर 2019 से बंद है। उत्पादन ठप होने के बावजूद सुरक्षा और रखरखाव के लिए अस्थायी कर्मचारियों को तैनात रखा गया है। मजदूरों का आरोप है कि काम तो उनसे लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं।

मजदूर संगठनों का कहना है कि यदि सरकार चाहती तो इस समस्या का समाधान कब का हो सकता था। उनका आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हालात यहां तक पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक चार महीने की बकाया तनख्वाह का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे फैक्टरी का गेट नहीं खोलेंगे और आंदोलन जारी रहेगा।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने आंदोलनकारियों से बात कर मुख्यमंत्री के स्तर पर हस्तक्षेप का भरोसा दिलाया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि मजदूरों के साथ अन्याय किया जा रहा है और सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

शनिवार को पूरे दिन फैक्टरी परिसर के बाहर पुलिस की कड़ी निगरानी रही। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, मजदूरों के तेवर देखते हुए साफ है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक दुर्गापुर केमिकल्स फैक्टरी के बाहर तनाव बना रहेगा।

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