आसनसोल : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी सुनवाई प्रक्रिया शनिवार को भी आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी रही। सालानपुर प्रखंड विकास कार्यालय में आयोजित हियरिंग के दौरान हालात ऐसे रहे कि सुबह से जुटे लोगों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा। अव्यवस्था और अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण कई बुजुर्ग और कमजोर लोग लाइन में ही बीमार पड़ गए, जबकि दिव्यांग व्यक्तियों को भी बिना किसी विशेष सुविधा के इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा।

शनिवार सुबह से ही सालानपुर बीडीओ कार्यालय के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज के इलाकों से आए नागरिक अपने दस्तावेज लेकर सुनवाई के लिए पहुंचे थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, कतारें लंबी होती चली गईं और लोगों का धैर्य जवाब देने लगा। तेज धूप और बैठने की समुचित व्यवस्था न होने से बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बुजुर्ग सुबह से लाइन में लगे थे। लंबा इंतजार, गर्मी और थकान के कारण कुछ की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें पानी पिलाया और कुछ को प्राथमिक उपचार भी कराना पड़ा। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही बुजुर्गों के लिए अलग कतार या प्राथमिकता दी गई।
सुनवाई के लिए बुलाए गए दिव्यांग व्यक्तियों ने भी अपनी पीड़ा जाहिर की। उनका कहना है कि चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद उन्हें सामान्य कतार में खड़ा रहना पड़ा। किसी तरह की विशेष सहायता या सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे उन्हें अपमान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
लाइन में खड़े लोगों में एक सेवानिवृत्त क्लर्क ने बताया कि वे वर्ष 1990 से लगातार मतदान करते आ रहे हैं। उनके अनुसार, उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में कोई त्रुटि नहीं थी, फिर भी उन्हें सुनवाई के लिए बुला लिया गया। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि बिना गलती के भी लोगों को बार-बार कार्यालय बुलाकर क्यों परेशान किया जा रहा है।
ऐसे कई लोग सामने आए, जिन्हें एक से अधिक बार हियरिंग के लिए बुलाया गया है। लोगों का कहना है कि हर बार नए कागजात मांगे जाते हैं और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की जाती। इससे आम नागरिकों में भ्रम और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जा रही यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि जिस तरीके से सुनवाई कराई जा रही है, उससे ऐसा लगता है मानो उद्देश्य मतदाता सूची सुधारने से ज्यादा लोगों को परेशान करना हो। कुछ लोगों ने केंद्र सरकार और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है।
कतार में खड़े कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि बार-बार लाइन में खड़ा कराना और बेवजह सुनवाई के लिए बुलाना आम जनता का अपमान है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब वर्षों से मतदान कर रहे नागरिकों के दस्तावेज सही हैं, तो उन्हें संदेह के घेरे में क्यों लाया जा रहा है।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस अव्यवस्था पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यदि सुनवाई प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।
शनिवार को सालानपुर में जो तस्वीर सामने आई, वह केवल एक कार्यालय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों की मांग है कि सुनवाई व्यवस्था को मानवीय, सरल और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और सामान्य लोगों को इस तरह की परेशानियों से न गुजरना पड़े।















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