कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को औपचारिक और संगठित रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में भाजपा प्रदेश इकाई ने स्टेट संकल्प पत्र समिति का गठन कर दिया है, जिसे आगामी चुनाव के लिए पार्टी के घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह समिति राज्य की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करते हुए जनता की अपेक्षाओं को घोषणापत्र में शामिल करेगी।

पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ नेता तपस रॉय को इस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और शिक्षाविद डॉ. अशोक लहरी को संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि आसनसोल दक्षिण से विधायक अग्निमित्रा पॉल को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इन तीनों नेताओं के अनुभव और जनसंपर्क का लाभ घोषणापत्र को जमीनी और व्यावहारिक बनाने में मिलेगा।
सूत्रों के मुताबिक, संकल्प पत्र समिति राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर किसानों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और बुद्धिजीवियों से संवाद करेगी। इसके साथ ही विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और उद्योग जैसे मुद्दों पर लोगों की राय ली जाएगी। पार्टी का दावा है कि घोषणापत्र केवल वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि अगले पांच वर्षों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप होगा।
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से विकास और रोजगार को लेकर असंतोष है। ऐसे में पार्टी जनता के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना चाहती है, ताकि चुनावी घोषणापत्र में वही मुद्दे प्राथमिकता से शामिल किए जा सकें, जो आम जनजीवन से सीधे जुड़े हों।
इसी बीच, भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी संगठन को धार देने के लिए 27 और 28 जनवरी को पश्चिम बंगाल के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे विभिन्न संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लेंगे और पार्टी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे में चुनावी रणनीति, बूथ स्तर की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी 30 और 31 जनवरी को पश्चिम बंगाल दौरा प्रस्तावित है। उनके दौरे को संगठन और चुनावी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अमित शाह राज्य में भाजपा के अभियान को और आक्रामक तथा व्यवस्थित बनाने पर जोर देंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संकल्प पत्र समिति का गठन और शीर्ष नेताओं के लगातार दौरे इस बात का संकेत हैं कि भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पार्टी जमीनी मुद्दों, संगठनात्मक मजबूती और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता के सहारे चुनावी मुकाबले में बढ़त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
कुल मिलाकर, भाजपा की यह पहल आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है, जिसमें घोषणापत्र को जनता की आवाज बनाने का दावा किया जा रहा है।














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