पांडवेश्वर में गीता वितरण पर हंगामा, भाजपा ने लगाया लोकतंत्र कुचलने का आरोप

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आसनसोल :  रविवार को पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के गोविंदपुर इलाके में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित जन-संयोग एवं श्रीमद्भागवत गीता वितरण कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ युवकों ने विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को लेकर पहले ही स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई थी, इसके बावजूद उत्पन्न हुए तनाव ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।

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इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा प्रदेश कमेटी के सदस्य एवं पूर्व विधायक जितेंद्र तिवारी ने सत्ताधारी दल पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह विरोध किसी स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे साजिशन दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेता नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के इशारे पर कुछ युवकों को आगे कर कार्यक्रम में व्यवधान पैदा किया गया। तिवारी ने कहा कि गीता जैसे पवित्र ग्रंथ के नाम से ही कुछ लोग असहज हो जाते हैं और इसी मानसिकता के कारण विरोध कराया गया।

पूर्व विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम से इतनी नफरत क्यों की जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गीता का नाम सुनते ही विरोध करने वालों की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि वे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से कितनी दूर हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह लोकतंत्र है, जहां किसी भी राजनीतिक दल को अपने कार्यक्रम और प्रचार का अधिकार है, उसे रोकना गणतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

जितेंद्र तिवारी ने नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती द्वारा उठाए गए उस सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उनसे पूछा गया था कि वे बीते साढ़े चार वर्षों में कहां थे। तिवारी ने कहा कि इसका जवाब जनता आने वाले समय में देगी। उन्होंने दावा किया कि पांडवेश्वर की जनता सच जानती है और वही तय करेगी कि किसे समर्थन देना है। किसी क्षेत्र में किसी नेता के प्रवेश पर रोक लगाने की बात लोकतंत्र की हत्या के समान है।

उन्होंने आगे कहा कि जनता को भ्रमित कर यह कहना कि किसी एक दल को भारी मतों से जीत मिल रही है, यह जनता के विवेक पर अविश्वास जताने जैसा है। लोकतंत्र में अंतिम निर्णय मतदाता का होता है, न कि किसी पार्टी या नेता का। भाजपा अपने विचार और कार्यक्रम लेकर जनता के बीच जाएगी और जनता जिसे योग्य समझेगी, उसे वोट देगी।

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विरोध करने वाले युवकों के प्रति भी तिवारी ने अपेक्षाकृत संयमित स्वर अपनाते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे, ताकि भविष्य में वे इस तरह के गलत कार्य न करें। उन्होंने आपसी सौहार्द और शांति की अपील करते हुए कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वैमनस्य समाज के लिए घातक है। भाजपा और तृणमूल, दोनों दलों के समर्थक इसी समाज का हिस्सा हैं और सभी का मंगल होना चाहिए।

पूर्व विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून को हाथ में लेकर किसी भी तरह से कार्यक्रम रोकना गलत है और इससे वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि भाजपा पांडवेश्वर के हर क्षेत्र में लोकतांत्रिक तरीके से अपना प्रचार जारी रखेगी और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी।पांडवेश्वर में गीता वितरण पर हंगामा, भाजपा ने लगाया लोकतंत्र कुचलने का आरोप

आसनसोल।
रविवार को पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के गोविंदपुर इलाके में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित जन-संयोग एवं श्रीमद्भागवत गीता वितरण कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ युवकों ने विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को लेकर पहले ही स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई थी, इसके बावजूद उत्पन्न हुए तनाव ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।

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इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा प्रदेश कमेटी के सदस्य एवं पूर्व विधायक जितेंद्र तिवारी ने सत्ताधारी दल पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह विरोध किसी स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे साजिशन दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेता नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के इशारे पर कुछ युवकों को आगे कर कार्यक्रम में व्यवधान पैदा किया गया। तिवारी ने कहा कि गीता जैसे पवित्र ग्रंथ के नाम से ही कुछ लोग असहज हो जाते हैं और इसी मानसिकता के कारण विरोध कराया गया।

पूर्व विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम से इतनी नफरत क्यों की जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गीता का नाम सुनते ही विरोध करने वालों की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि वे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से कितनी दूर हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह लोकतंत्र है, जहां किसी भी राजनीतिक दल को अपने कार्यक्रम और प्रचार का अधिकार है, उसे रोकना गणतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

जितेंद्र तिवारी ने नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती द्वारा उठाए गए उस सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उनसे पूछा गया था कि वे बीते साढ़े चार वर्षों में कहां थे। तिवारी ने कहा कि इसका जवाब जनता आने वाले समय में देगी। उन्होंने दावा किया कि पांडवेश्वर की जनता सच जानती है और वही तय करेगी कि किसे समर्थन देना है। किसी क्षेत्र में किसी नेता के प्रवेश पर रोक लगाने की बात लोकतंत्र की हत्या के समान है।

उन्होंने आगे कहा कि जनता को भ्रमित कर यह कहना कि किसी एक दल को भारी मतों से जीत मिल रही है, यह जनता के विवेक पर अविश्वास जताने जैसा है। लोकतंत्र में अंतिम निर्णय मतदाता का होता है, न कि किसी पार्टी या नेता का। भाजपा अपने विचार और कार्यक्रम लेकर जनता के बीच जाएगी और जनता जिसे योग्य समझेगी, उसे वोट देगी।

विरोध करने वाले युवकों के प्रति भी तिवारी ने अपेक्षाकृत संयमित स्वर अपनाते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे, ताकि भविष्य में वे इस तरह के गलत कार्य न करें। उन्होंने आपसी सौहार्द और शांति की अपील करते हुए कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वैमनस्य समाज के लिए घातक है। भाजपा और तृणमूल, दोनों दलों के समर्थक इसी समाज का हिस्सा हैं और सभी का मंगल होना चाहिए।

पूर्व विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून को हाथ में लेकर किसी भी तरह से कार्यक्रम रोकना गलत है और इससे वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि भाजपा पांडवेश्वर के हर क्षेत्र में लोकतांत्रिक तरीके से अपना प्रचार जारी रखेगी और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी।

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