आसनसोल में वैदिक संस्कारों और शिक्षा का अनुकरणीय संगम

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आसनसोल  :  मंगलवार को आर्य समाज आसनसोल के तत्वावधान में शहर में वैदिक परंपरा और शैक्षणिक चेतना का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने आध्यात्मिक आस्था के साथ बौद्धिक उन्नयन का संदेश दिया। दिनभर चले कार्यक्रमों में जहां वैदिक संस्कारों की गूंज सुनाई दी, वहीं शिक्षकों के बीच ज्ञान आधारित प्रतिस्पर्धा ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।

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कार्यक्रम की शुरुआत दयानंद विद्यालय परिसर में आयोजित 51 कुंडीय महायज्ञ से हुई। वैदिक मंत्रोच्चारण और आहुति के साथ संपन्न इस हवन में समाज की सुख-शांति, आपसी सौहार्द, राष्ट्र कल्याण और वैश्विक शांति की कामना की गई। यज्ञ स्थल पर अनुशासन, श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के पालन का भाव स्पष्ट रूप से झलक रहा था। विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाजसेवियों की सहभागिता ने आयोजन को सामूहिक चेतना का रूप दिया।

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हवन उपरांत कार्यक्रम का दूसरा चरण डी.ए.वी. हाई स्कूल में आयोजित हुआ, जहां शिक्षकों के बीच वैदिक ज्ञान पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता संपन्न कराई गई। इस प्रतियोगिता में आर्य कन्या उच्च विद्यालय, डी.ए.वी. हाई स्कूल तथा दयानंद विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि वैदिक साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति शिक्षकों की समझ को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।

प्रतियोगिता के दौरान पूछे गए प्रश्नों में वेद, उपनिषद, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़े विषय शामिल थे। शिक्षकों ने गहन अध्ययन और तर्कपूर्ण उत्तरों के माध्यम से अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया। दर्शक दीर्घा में मौजूद विद्यार्थियों और अन्य शिक्षकों ने भी इस आयोजन से प्रेरणा ली।

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कार्यक्रम में तीनों विद्यालयों के सचिव तथा आर्य समाज आसनसोल के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद केडिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वैदिक संस्कृति केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित और मूल्यनिष्ठ बनाने का मार्ग है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे वैदिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को संस्कारित दिशा दें।

इस अवसर पर बिंदु केडिया, नारायण पासवान, उपेंद्र कुमार सिंह, पूनम भारती, रवि कुमार, बृजेंद्र बहादुर सिंह, जवाहर संगुई, राम मिलन पांडेय, संजीत कुमार शर्मा, सुभाष कुमार पांडेय, उदय कुमार सिंह, दिलीप नारायण मिश्रा, नीलम शर्मा, लक्ष्मी नारायण केडिया और सुनील ठाकुर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज और शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी बताया।

आयोजकों का कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल वैदिक परंपराओं को जीवंत रखते हैं, बल्कि शिक्षण संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, सहयोग और आपसी सम्मान को भी मजबूती प्रदान करते हैं। मंगलवार का यह आयोजन आसनसोल के सांस्कृतिक और शैक्षणिक जीवन में एक सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

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