आसनसोल : बुधवार को एक बार फिर आशा कर्मियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा जैसी लंबित मांगों के समर्थन में पिछले वर्ष 23 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहीं आशा कार्यकर्ताओं ने आसनसोल के बीएनआर मोड़ इलाके में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। धरना स्थल तक पहुंचने से पहले आशा कर्मियों ने विरोध मार्च निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

धरना स्थल पर माहौल पूरी तरह आंदोलनमय रहा। अलग-अलग इलाकों से आई आशा कर्मियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों का कहना है कि वे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिलता है और न ही बुनियादी सामाजिक सुरक्षा।
आशा कर्मियों के संगठन की नेता मंजू चक्रवर्ती ने धरना को संबोधित करते हुए कहा कि 23 दिसंबर से राज्यभर की आशा कर्मियां लगातार हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आशा कर्मियों की न्यूनतम मासिक मानदेय 15 हजार रुपये तय की जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें।
उन्होंने आगे बताया कि मांगों में केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल हैं। संगठन की मांग है कि किसी आशा कर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। इसके साथ ही मातृत्व अवकाश की सुविधा दी जाए और बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में आशा कर्मी के परिवार को सरकारी सहायता सुनिश्चित की जाए।

मंजू चक्रवर्ती ने 21 जनवरी की घटना का जिक्र करते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस दिन राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा कर्मियों को कोलकाता स्थित स्वास्थ्य भवन बुलाया गया था, जहां उनकी मांगों पर चर्चा होनी थी। इसके लिए पूरे राज्य की आशा कर्मियां तैयार थीं, लेकिन विभिन्न जिलों में उन्हें जबरन कोलकाता जाने से रोका गया। कई जगहों पर पुलिस और प्रशासन की मदद से आशा कर्मियों को रोका गया, जो बेहद निंदनीय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो आशा कर्मियां किसी तरह कोलकाता पहुंच पाईं, उनके साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया। इससे आशा कर्मियों में गहरी नाराजगी है और यही कारण है कि अब आंदोलन और तेज किया जा रहा है।
धरना में मौजूद आशा कर्मियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका आंदोलन और हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि वे किसी दबाव में झुकने वाली नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बुधवार के इस धरना-प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया है कि आशा कर्मियों का सब्र जवाब देने लगा है। अब देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर कब और क्या फैसला लेती है, क्योंकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।














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