आसनसोल : रविवार को आसनसोल की राजनीति उस समय अचानक गरमा गई, जब नगर निगम के वार्ड संख्या 25 से कांग्रेस पार्षद एस. एम. मुस्तफा ने एसआईआर हियरिंग नोटिस के विरोध में अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। यह विरोध न केवल अपने अंदाज़ के कारण चर्चा में रहा, बल्कि उसने निर्वाचन प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर नई बहस भी छेड़ दी।
दरअसल, एसआईआर केंद्र से हियरिंग के लिए बुलाए जाने पर पार्षद एस. एम. मुस्तफा ने इसे व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चोट करार दिया। रविवार को वे ढोल-बैंड बाजे के साथ सीधे एसआईआर हियरिंग केंद्र पहुंचे। बैंड-बाजे की आवाज और पार्षद के तेवरों ने देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुटा दी। कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और आम लोग भी इस विरोध को कौतूहल से देखते रहे।
प्रदर्शन के दौरान पार्षद मुस्तफा ने कहा कि वे कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। उन्होंने कई बार चुनाव लड़ा है और जनता के विश्वास से नगर निगम में पहुंचे हैं। ऐसे में उन्हें हियरिंग के लिए बुलाया जाना न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। उनका कहना था कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों को इस तरह संदेह के दायरे में खड़ा किया जाएगा, तो आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं से भरोसा उठ जाएगा।
अपने विरोध को प्रतीकात्मक रूप देते हुए एस. एम. मुस्तफा ने तीखे शब्दों में कहा कि जब किसी की मौत होती है, तब उसके जनाज़े में बैंड-बाजा बजता है। आज उन्होंने यही बैंड-बाजा इसलिए बजवाया, क्योंकि उनके अनुसार निर्वाचन आयोग की संवेदनशीलता और नैतिकता समाप्त हो चुकी है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और समर्थकों ने तालियों व नारों के साथ उनका समर्थन किया।
पार्षद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर जनप्रतिनिधियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से लोकतंत्र मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर होता है। उनका यह भी कहना था कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और व्यवस्था बहाल की। हालांकि, काफी देर तक एसआईआर केंद्र के बाहर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। प्रशासन की ओर से फिलहाल इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक पार्षद के विरोध तक सीमित नहीं रहेगी। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले से ही विपक्षी दलों में असंतोष है और यह विरोध उसी असंतोष की एक झलक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रदर्शन तथा राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, रविवार को हुआ यह घटनाक्रम आसनसोल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। यह साफ संकेत देता है कि निर्वाचन से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है।

















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