आसनसोल : रविवार को आसनसोल उत्तर थाना क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक तनाव का केंद्र बन गया, जब एक आदिवासी महिला से कथित उत्पीड़न और जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप को लेकर आदिवासी समुदाय सड़कों पर उतर आया। तृणमूल कांग्रेस के पार्षद श्याम सोरेन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष आसनसोल उत्तर थाने पहुंचे और आरोपी भाजपा नेता की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि थाना अंतर्गत शालडांगा इलाके में रहने वाली एक आदिवासी महिला के साथ भाजपा से जुड़े एक नेता ने न केवल मारपीट की, बल्कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा करने का भी प्रयास किया। पीड़िता ने इस संबंध में थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया।
रविवार सुबह से ही थाने के सामने प्रदर्शन का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, हाथों में पारंपरिक हथियार लिए थाने के समक्ष एकत्र हुईं। महिलाओं का कहना था कि यह केवल एक महिला का मामला नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। उनका आरोप था कि प्रभावशाली राजनीतिक रसूख के कारण आरोपी को संरक्षण दिया जा रहा है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे तृणमूल कांग्रेस के पार्षद श्याम सोरेन ने आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में कमजोर वर्गों की जमीन पर कब्जा करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि पीड़िता को जल्द न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सोरेन ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि आदिवासी समाज अब अन्याय को चुपचाप सहने वाला नहीं है।
वहीं, दूसरी ओर इस पूरे मामले में भाजपा नेता कृष्णा प्रसाद ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने रविवार को बयान जारी कर कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि तृणमूल कांग्रेस जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रही है, ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके। कृष्णा प्रसाद ने कहा कि उनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है और वे कानून पर पूरा भरोसा रखते हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसनसोल उत्तर थाना क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। थाना सूत्रों के अनुसार, पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का यह भी कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन प्रशासन पर बढ़ते जनदबाव के कारण मामले को लेकर सक्रियता बढ़ गई है।
इस घटनाक्रम ने आसनसोल की राजनीति में एक बार फिर आदिवासी मुद्दों को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है, क्योंकि इसमें जमीन, महिला सुरक्षा और आदिवासी अधिकार जैसे संवेदनशील विषय जुड़े हुए हैं। रविवार को हुए प्रदर्शन के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है और सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

















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