लोन बकाया पर इंडियन बैंक ने राइस मिल जब्त की

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पूर्व बर्दवान :  .सोमवार, 2 फरवरी 2026 को पूर्व बर्दवान जिले में बैंकिंग सख्ती की एक बड़ी मिसाल देखने को मिली, जब इंडियन बैंक ने करोड़ों रुपये के बकाया ऋण की वसूली के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाया। कालना अदालत के आदेश के अनुपालन में बैंक ने मंतेश्वर थाना क्षेत्र के सातगछिया इलाके में स्थित ‘मैसर्स आदिनाथ राइस मिल’ का भौतिक कब्जा अपने हाथ में ले लिया। इस कार्रवाई से इलाके में खलबली मच गई और यह संदेश साफ हो गया कि सार्वजनिक धन की वसूली को लेकर बैंक अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

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बैंक प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, ‘मैसर्स आदिनाथ राइस मिल’ के साझेदार रोहित चटर्जी और ब्रतीश चटर्जी ने वर्ष 2019 में इंडियन बैंक की सातगछिया शाखा से व्यवसाय विस्तार के लिए ऋण लिया था। समय के साथ यह ऋण राशि बढ़कर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये तक पहुंच गई। शुरुआती दौर में किस्तों का भुगतान किया गया, लेकिन बाद में लगातार चूक होने लगी। बैंक की ओर से कई बार नोटिस भेजे गए, समझौते के अवसर दिए गए और बकाया चुकाने के लिए पर्याप्त समय भी प्रदान किया गया, इसके बावजूद मिल प्रबंधन की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।

लंबे समय तक बकाया बने रहने और जवाब न मिलने के बाद बैंक ने कानूनी प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया। सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत आवश्यक कार्रवाई करते हुए मामला अदालत तक पहुंचा। कालना के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने बैंक के पक्ष में आदेश पारित किया, जिसके बाद सोमवार को यह बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई।

सुबह से ही माझरग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित इस राइस मिल परिसर में हलचल शुरू हो गई थी। इंडियन बैंक के अधिकृत अधिकारी और चीफ मैनेजर सपन कुमार जाना के नेतृत्व में बैंक की टीम मौके पर पहुंची। उनके साथ सीनियर मैनेजर रोहित कुमार, रिकवरी एजेंट राजीव बनर्जी, दिनेश कुमार सेन और विप्लव भट्टाचार्य सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लगभग 1.42 एकड़ में फैली राइस मिल और फैक्ट्री भवन को सील कर बैंक ने उसका भौतिक कब्जा ले लिया।

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कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। बैंक अधिकारियों ने मिल परिसर में आवश्यक सूचना चस्पा कर यह स्पष्ट किया कि यह संपत्ति अब बैंक के अधीन है और आगे की प्रक्रिया कानून के अनुसार की जाएगी।

इंडियन बैंक के अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कदम किसी के खिलाफ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और वसूली के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि बैंक के पास आम जनता का पैसा जमा होता है और उसका दुरुपयोग या लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यदि कोई उधारकर्ता जानबूझकर भुगतान से बचता है, तो बैंक को मजबूरन सख्त कदम उठाने पड़ते हैं।

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बैंक प्रबंधन ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भी ऐसे डिफॉल्टरों के खिलाफ सरफेसी अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल बकाया राशि की वसूली करना है, बल्कि अन्य ऋण लेने वालों को भी यह संदेश देना है कि समय पर भुगतान करना उनकी जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों और उद्योग जगत में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से ईमानदार उद्यमियों का भरोसा बैंकिंग व्यवस्था पर और मजबूत होगा, जबकि लापरवाह डिफॉल्टरों को सख्त चेतावनी मिलेगी। कुल मिलाकर, इंडियन बैंक की यह कार्रवाई वित्तीय अनुशासन और कानून के पालन की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखी जा रही है।

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