छह दिन की हड़ताल, कचरे में डूबा आसनसोल शहर

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आसनसोल : नगर निगम के अधीन कार्यरत सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर की रफ्तार थाम दी है। आंदोलन को लगभग एक सप्ताह पूरा होने को है, लेकिन अब तक प्रशासन और कर्मियों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। नतीजतन, आसनसोल के गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख सड़कों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पताल परिसरों तक कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं। दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण की आशंका ने आमजन के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा पैदा कर दिया है।

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शहर के नागरिकों का कहना है कि नियमित रूप से टैक्स और अन्य शुल्क चुकाने के बावजूद उन्हें बुनियादी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई इलाकों में घरों के सामने कचरा जमा हो चुका है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूलों और अस्पतालों के आसपास देखी जा रही है, जहां गंदगी के कारण वातावरण अस्वस्थ हो गया है। माध्यमिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों और अभिभावकों में भी गहरी चिंता है।

नगर निगम की विपक्षी नेता चैताली तिवारी ने हड़ताल को लेकर निगम प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों की मांगें कोई नई नहीं हैं और लंबे समय से लंबित पड़ी हुई हैं। प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थिति यहां तक पहुंच गई है। उनका आरोप है कि निगम केवल कर वसूली में सक्रिय है, लेकिन सेवाओं के नाम पर नागरिकों को निराशा ही हाथ लग रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शहर में परीक्षा केंद्रों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फैला है, तो प्रशासन की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही।

चैताली तिवारी ने यह भी कहा कि नगर निगम की कार्यशैली ने उसे जनता की नजरों में विफल साबित कर दिया है। उन्होंने मांग की कि बोर्ड को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह संकट स्वास्थ्य आपदा का रूप ले सकता है।

दूसरी ओर, समाजसेवी एवं भाजपा नेता कृष्णा प्रसाद ने आंदोलनरत कर्मियों के समर्थन में आगे आते हुए कहा कि वे लगातार सफाई कर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान कर्मियों को आवश्यक खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनका कहना है कि यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे शहर के सम्मान और स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल है।

कृष्णा प्रसाद ने आरोप लगाया कि छह दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नगर निगम किसी ठोस निर्णय पर नहीं पहुंच सका है। उन्होंने कहा कि निगम के सभी 106 वार्डों में हालात लगभग एक जैसे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। उनके अनुसार, यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जनता का आक्रोश और बढ़ेगा।

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विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि प्रशासन लगातार सफाई कर्मियों से संवाद कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय प्रक्रिया को पूरा करने में समय लगता है और नियमों के तहत 15 से 20 दिन का समय स्वाभाविक है। उन्होंने दोहराया कि ‘नो वर्क, नो पे’ की नीति लागू है और बिना कार्य के भुगतान संभव नहीं है।

चेयरमैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गंदगी के कारण किसी प्रकार की संक्रामक बीमारी फैलती है, तो यह पूरे शहर के लिए गंभीर संकट बन सकता है। उन्होंने सफाई कर्मियों से अपील की कि वे हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटें और बातचीत के जरिए समाधान निकालने में सहयोग करें। साथ ही, उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति न करने और कर्मचारियों को भड़काने से बचने का आग्रह किया।

फिलहाल, प्रशासनिक आश्वासनों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों को झेलनी पड़ रही है। शहरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही कोई ठोस निर्णय सामने आए, जिससे सफाई व्यवस्था बहाल हो सके और आसनसोल को इस गंदगी और अनिश्चितता से राहत मिल सके।

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