आसनसोल : पश्चिम बर्धमान : शहर की लगातार बढ़ती आबादी, व्यावसायिक गतिविधियों और वाहनों की संख्या के कारण यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के ट्रैफिक विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लगभग सभी प्रमुख पक्षों की भागीदारी रही, जिससे इसे एक सर्वसमावेशी प्रयास माना जा रहा है।

बैठक में बस चालक, मिनी बस चालक, बस मालिक, विभिन्न बस यूनियनों के प्रतिनिधि और परिवहन संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहर की मौजूदा यातायात स्थिति का आकलन करते हुए स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी और अनुशासनहीनता के कारण न केवल जाम की समस्या बढ़ रही है, बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में सभी हितधारकों का सहयोग आवश्यक है।
ट्रैफिक अधिकारियों ने बैठक में कहा कि शहर की सड़कों पर यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से बस चालकों से अपील की कि वे निर्धारित मार्गों और समय-सारिणी का पालन करें, ताकि यातायात का दबाव संतुलित रहे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यातायात नियम केवल दंड के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
बैठक के संबंध में तृणमूल परिवहन संगठन के नेता राजू अहलूवालिया ने जानकारी दी कि ट्रैफिक विभाग ने बस चालकों को गति सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की आदतों पर विशेष रूप से चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि यदि कोई चालक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और कानूनी कार्रवाई तक शामिल हो सकती है।
बैठक में यात्रियों के साथ व्यवहार के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया गया। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। इसलिए बस चालकों और परिचालकों का व्यवहार शालीन, संयमित और सम्मानजनक होना चाहिए। टिकट वितरण, बैठने की व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के निर्देश दिए गए।

राजू अहलूवालिया ने बताया कि बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ विशेष संवेदनशीलता बरती जाए। बसों में अनावश्यक भीड़ न बढ़ाई जाए और क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाई जाएं। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
वर्तमान में चल रही माध्यमिक परीक्षाओं को देखते हुए ट्रैफिक विभाग ने परिवहन सेवाओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बैठक में कहा गया कि परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। इसके लिए बसों की नियमितता, समयपालन और मार्ग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में शहर की प्रमुख सड़कों, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाएगी। सीसीटीवी कैमरों और ट्रैफिक कर्मियों की मदद से नियमों के उल्लंघन पर कड़ी नजर रखी जाएगी। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, गलत लेन में वाहन चलाने और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मौजूद बस यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन को सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यदि यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, तो इसका लाभ न केवल आम नागरिकों को मिलेगा, बल्कि परिवहन व्यवसाय भी सुचारू रूप से चलेगा। यूनियनों ने सुझाव दिया कि समय-समय पर इस तरह की समन्वय बैठकें आयोजित की जानी चाहिए, ताकि समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से हो सके।
ट्रैफिक विभाग ने अंत में यह संदेश दिया कि यातायात नियमों का पालन केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन, परिवहन संगठन और आम जनता के सामूहिक प्रयास से ही शहर की सड़कों को सुरक्षित, अनुशासित और सुव्यवस्थित बनाया जा सकता है। बैठक को शहर में यातायात सुधार की दिशा में एक ठोस और सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।















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