आसनसोल : पश्चिम बंगाल की अंतरिम बजट घोषणा के बाद आसनसोल सहित पूरे राज्य में महिलाओं के चेहरे पर संतोष और प्रसन्नता साफ झलक रही है। राज्य सरकार की बहुप्रशंसित लक्ष्मी भंडार योजना के अंतर्गत मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की वृद्धि किए जाने के फैसले को महिलाओं ने राहत और सम्मान दोनों के रूप में स्वीकार किया है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब महंगाई और घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए जीवनयापन चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

राज्य विधानसभा में वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत अंतरिम बजट में महिलाओं को आर्थिक संबल देने की दिशा में यह कदम सबसे अहम माना जा रहा है। बजट प्रस्ताव के अनुसार फरवरी 2026 से लक्ष्मी भंडार योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग की महिलाओं को मिलने वाली मासिक सहायता राशि 1,000 रुपये से बढ़कर 1,500 रुपये हो जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को अब 1,700 रुपये प्रतिमाह प्राप्त होंगे। पहले यह राशि 1,200 रुपये थी।
आसनसोल की लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि यह अतिरिक्त राशि उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का प्रतीक भी है। वार्ड संख्या 27 की गृहिणी सुचित्रा मंडल ने कहा कि यह पैसा बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और घरेलू आवश्यकताओं में उपयोग किया जाता है। राशि बढ़ने से अब उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसी तरह रेलपार इलाके की लाभार्थी महिला बासंती हेंब्रम ने कहा कि आदिवासी महिलाओं के लिए यह निर्णय विशेष रूप से सहायक है, क्योंकि रोजगार के अवसर सीमित हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस योजना से लगभग 2.21 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। आसनसोल और आसपास के औद्योगिक व अर्ध-शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में महिलाएं असंगठित क्षेत्र से जुड़ी हैं या घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित हैं। ऐसे में लक्ष्मी भंडार योजना उनके लिए नियमित आय का भरोसेमंद स्रोत बन गई है।

महिलाओं के अलावा इस बजट में सरकारी कर्मचारियों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मियों को भी राहत दी गई है। राज्य सरकार ने महंगाई भत्ते में 4 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है, जिससे सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को आंशिक रूप से पूरा किया गया है। वहीं, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कर्मियों के मासिक भत्ते में 1,000 रुपये की वृद्धि का फैसला भी बजट का अहम हिस्सा रहा।
सत्ता पक्ष ने इस बजट को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण का बजट बताया है। तृणमूल कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार ने समाज के कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी है। उनका तर्क है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना समग्र विकास संभव नहीं है।
हालांकि विपक्ष ने इन घोषणाओं को चुनावी दृष्टि से प्रेरित बताया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की घोषणाएं केवल मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए की जा रही हैं। बावजूद इसके, आम महिलाओं की प्रतिक्रिया इन राजनीतिक आरोपों से अलग नजर आ रही है। उनके लिए यह फैसला तत्काल राहत देने वाला है।
आसनसोल के सामाजिक संगठनों का मानना है कि लक्ष्मी भंडार योजना ने महिलाओं को परिवार और समाज में एक नई पहचान दी है। अब वे घरेलू खर्चों में योगदान दे पा रही हैं और अपने छोटे फैसले स्वयं लेने में सक्षम हुई हैं। कई महिलाओं ने यह भी कहा कि सरकार की यह पहल उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती है।
कुल मिलाकर, लक्ष्मी भंडार योजना में 500 रुपये की वृद्धि ने आसनसोल की महिलाओं में नई उम्मीद जगाई है। महंगाई के दौर में यह अतिरिक्त सहायता उनके जीवन को कुछ हद तक आसान बनाएगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह योजना महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को किस हद तक स्थायी रूप से मजबूत कर पाती है।















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