आसनसोल : पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं। न तो निर्वाचन आयोग ने चुनावी कार्यक्रम घोषित किया है और न ही किसी राजनीतिक दल ने प्रत्याशियों के नामों की औपचारिक घोषणा की है। इसके बावजूद पश्चिम बर्धमान जिले के बाराबनी विधानसभा क्षेत्र में सियासी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विधायक और प्रभावशाली नेता विधान उपाध्याय के समर्थन में क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में दीवार लेखन के जरिये प्रचार शुरू हो चुका है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
सलानपुर ब्लॉक समेत बाराबनी विधानसभा के कई हिस्सों में दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में नारे लिखे जा रहे हैं। कहीं “2026 में फिर से विधान उपाध्याय” तो कहीं “घर का बेटा, काम का बेटा” जैसे संदेशों के साथ तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न जोड़ा फूल पर मतदान की अपील की जा रही है। कुछ स्थानों पर तो साफ तौर पर यह लिखा गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में बाराबनी से विधायक पद के लिए विधान उपाध्याय को फिर से जिताया जाए। चुनावी घोषणा से पहले इस तरह का प्रचार क्षेत्र में आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

समर्थकों में दिखा उत्साह
स्थानीय तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधान उपाध्याय केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि बाराबनी की जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक विकास कार्यों में विधायक की सक्रिय भूमिका रही है। सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर उन्होंने लगातार आवाज उठाई है। यही वजह है कि कार्यकर्ता और समर्थक स्वतःस्फूर्त होकर उनके पक्ष में माहौल बना रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का दावा है कि बाराबनी की जनता खुद चाहती है कि अगले चुनाव में भी वही नेतृत्व क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करे। इसी भावना के चलते बिना किसी औपचारिक निर्देश के दीवार लेखन और प्रचार शुरू हो गया है। समर्थकों का कहना है कि यह अभियान किसी संगठनात्मक आदेश का परिणाम नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और लगाव की अभिव्यक्ति है।
पार्टी का आधिकारिक पक्ष
इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से संतुलित प्रतिक्रिया सामने आई है। सलानपुर ब्लॉक तृणमूल कांग्रेस के सह-अध्यक्ष भोला सिंह ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने फिलहाल इस तरह के प्रचार के लिए कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि विधान उपाध्याय कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच विश्वास का नाम हैं। लोग उन्हें सिर्फ विधायक नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानते हैं, इसलिए उनका उत्साह स्वाभाविक है।
भोला सिंह के अनुसार, चुनाव में अभी समय है और पार्टी नेतृत्व समय आने पर प्रत्याशियों को लेकर फैसला करेगा। फिलहाल जो कुछ भी हो रहा है, वह कार्यकर्ताओं की भावनाओं का प्रतीक है, न कि पार्टी की घोषित रणनीति।

विपक्ष में बढ़ी बेचैनी
चुनाव से काफी पहले शुरू हुए इस तरह के प्रचार ने विपक्षी दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तृणमूल समर्थकों की यह सक्रियता विपक्ष के लिए संकेत है कि बाराबनी में सत्ताधारी दल की पकड़ अभी मजबूत बनी हुई है। हालांकि विपक्ष इसे आचार संहिता से पहले माहौल बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहा है।
आगे की राजनीति पर नजर
बाराबनी में दीवार लेखन से शुरू हुई यह राजनीतिक सरगर्मी आने वाले समय में और तेज हो सकती है। भले ही चुनाव में अभी समय हो, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि 2026 की लड़ाई की जमीन अभी से तैयार होने लगी है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में अन्य दल किस तरह अपनी रणनीति तय करते हैं और यह शुरुआती प्रचार आगे की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।















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