आसनसोल : विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे नागरिकों के लिए रविवार को राहत भरी खबर सामने आई। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट बनवाने और उसके नवीनीकरण की प्रणाली को पहले से अधिक सरल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से नई पासपोर्ट नियमावली 2026 लागू करने की घोषणा की है। यह संशोधित व्यवस्था 15 फरवरी 2026 से प्रभाव में आ जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे आवेदकों का समय बचेगा, फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से तेज गति से पूरी की जा सकेगी।

नए प्रावधानों के तहत सबसे बड़ा बदलाव दस्तावेज सत्यापन और पुलिस जांच की प्रक्रिया में किया गया है। वर्षों से लोगों की शिकायत रही है कि कागजी औपचारिकताओं और लंबी जांच के कारण पासपोर्ट बनने में काफी विलंब होता है। अब सरकार ने दस्तावेजों की सूची को सीमित करते हुए आधार कार्ड सहित अन्य मान्यता प्राप्त सरकारी पहचान पत्रों को प्राथमिक दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया है। इससे आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
पुलिस सत्यापन प्रणाली को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल माध्यम से सूचना साझा होने के कारण जांच में लगने वाला समय काफी घट जाएगा। पहले जहां इसमें कई सप्ताह लग जाते थे, वहीं अब इसे कुछ दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इतना ही नहीं, विशेष परिस्थितियों में पासपोर्ट पहले जारी कर बाद में सत्यापन करने की व्यवस्था भी रखी गई है, ताकि जरूरी यात्रा करने वालों को इंतजार न करना पड़े।
पासपोर्ट सेवा पोर्टल को भी नए सिरे से विकसित किया गया है। अब आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकेंगे, जरूरी दस्तावेज अपलोड करेंगे और अपनी सुविधा के अनुसार अपॉइंटमेंट तय कर पाएंगे। रियल टाइम संदेशों के माध्यम से फाइल की स्थिति की जानकारी मिलती रहेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका स्वतः समाप्त होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी से भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।
हालांकि प्रशासन ने आवेदकों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। यदि अपलोड किए गए दस्तावेज गलत, अपूर्ण या भ्रामक पाए जाते हैं तो आवेदन तुरंत निरस्त किया जा सकता है। इसलिए फॉर्म भरते समय नाम, जन्मतिथि, पते और अन्य विवरणों की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। तकनीकी सुविधा बढ़ने के साथ जिम्मेदारी भी आवेदक की होगी।

नाबालिगों के लिए नियमों में विशेष राहत दी गई है। बच्चों के पासपोर्ट के लिए डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल पहचान पत्र को पर्याप्त माना जाएगा। इससे अभिभावकों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इसके अलावा सरकार ने छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नए पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने की योजना भी बनाई है। उद्देश्य यह है कि दूर-दराज के लोगों को महानगरों की यात्रा कर समय और धन खर्च न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को ध्यान में रखते हुए की गई है। पढ़ाई, रोजगार, पर्यटन और व्यवसाय के लिए विदेश जाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद प्रणाली की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
रविवार को जारी इस घोषणा ने लाखों संभावित आवेदकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। सरकार ने साफ किया है कि नई नियमावली सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना प्रक्रियाओं को सरल बनाएगी। यदि आप निकट भविष्य में पासपोर्ट बनवाने की सोच रहे हैं, तो निर्धारित तिथि से पहले अपने दस्तावेज तैयार रखना समझदारी होगी। आने वाले समय में डिजिटल व्यवस्था ही पासपोर्ट सेवा का आधार बनने जा रही है।















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