जामुड़िया : सोमवार को पश्चिम बर्धमान जिले के जामुड़िया थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सातग्राम स्थित 8 नंबर रेलवे फाटक के समीप दोपहर लगभग 3:30 बजे घटित इस हादसे में दो यात्री बसों की आमने-सामने नहीं, बल्कि पीछे से हुई टक्कर में करीब 40 यात्री घायल हो गए। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कुछ समय के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बराकर से रानीगंज की ओर जा रही एक मिनी बस सातग्राम इलाके में सड़क किनारे यात्रियों को उतार रही थी। उसी दौरान आसनसोल से दुर्गापुर की ओर जा रही एक तेज रफ्तार एक्सप्रेस बस अचानक सामने सड़क पर आ गई एक गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित हो गई। चालक द्वारा अचानक ब्रेक लगाने और बस मोड़ने के कारण एक्सप्रेस बस सीधे खड़ी मिनी बस के पिछले हिस्से से जा टकराई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि मिनी बस का पिछला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि एक्सप्रेस बस का अगला केबिन बुरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसे के समय दोनों बसों में यात्रियों की संख्या काफी अधिक थी। टक्कर के साथ ही यात्रियों की चीख-पुकार गूंज उठी और कुछ ही पलों में घटनास्थल पर भयावह दृश्य उत्पन्न हो गया।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। जामुड़िया थाना पुलिस भी तत्परता दिखाते हुए तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और पुलिस के सहयोग से घायल यात्रियों को बसों से बाहर निकाला गया। कई यात्रियों को सिर, हाथ, पैर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं।
गंभीर रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल रानीगंज स्थित ‘रॉयल केयर अस्पताल’ भेजा गया, जबकि अन्य घायलों को आसनसोल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस भीषण दुर्घटना में अब तक किसी की मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है।
दुर्घटना के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर लंबा जाम लग गया। दोनों क्षतिग्रस्त बसें सड़क पर आड़ी-तिरछी स्थिति में फंसी रहीं, जिससे कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। बाद में क्रेन की सहायता से बसों को हटाया गया, जिसके बाद यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो सकी।
इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर लावारिस पशुओं का खुलेआम घूमना अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। आए दिन मवेशियों के अचानक सड़क पर आ जाने से दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हाईवे पर पशुओं को रोकने के लिए न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है और न ही निगरानी की कोई प्रभावी व्यवस्था है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी धरातल पर नजर नहीं आया। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पुलिस प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। एक्सप्रेस बस के चालक से पूछताछ की जा रही है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज गति और अचानक मवेशी के सड़क पर आने को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
यह दुर्घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लावारिस पशुओं की समस्या को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। सोमवार को पूरे क्षेत्र में इस हादसे की चर्चा बनी रही और लोग यही सवाल पूछते नजर आए कि आखिर कब तक यात्रियों की जान ऐसे ही खतरे में डाली जाती रहेगी।















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