रानीगंज : रानीगंज के एग्रा इलाके में उस समय राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया, जब जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत पहुंचीं विधायक अग्निमित्रा पॉल का तृणमूल समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते नारेबाजी तेज हो गई और “गो बैक” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

विधायक अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार घर-घर संपर्क अभियान चला रही थीं। इस दौरान वे स्थानीय लोगों से मिलकर समस्याएं सुनने और आगामी दिनों की योजनाओं पर चर्चा करने पहुंची थीं। लेकिन जैसे ही उनके इलाके में आने की खबर फैली, विरोधी दल के समर्थक बड़ी संख्या में वहां जुट गए। उन्होंने विकास कार्यों को लेकर असंतोष जताते हुए विधायक के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
विरोध कर रहे लोगों का आरोप था कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ। स्थानीय सुविधाओं, सड़क, पानी और अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों को चुनाव के समय ही जनता की याद आती है, जबकि बाद में समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।
नारेबाजी बढ़ती देख मौके पर मौजूद पुलिस बल सतर्क हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने विधायक को घेरे में लेकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई और किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली।
घटना के बाद विधायक अग्निमित्रा पॉल ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उनका विरोध सुनियोजित तरीके से कराया गया। उन्होंने कहा कि वे लोगों की समस्याएं सुनने और विकास के मुद्दों पर संवाद करने आई थीं, लेकिन राजनीतिक कारणों से उन्हें रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं उन्हें जनता के बीच जाने से रोक नहीं सकतीं और वे आगे भी अपना जनसंपर्क जारी रखेंगी।
वहीं दूसरी ओर विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उनका आक्रोश वास्तविक है और इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि क्षेत्र की समस्याओं पर ठोस पहल की जरूरत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल के करीब आते ही इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं। रानीगंज और आसपास के इलाकों में विभिन्न दल अपनी-अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में जनसंपर्क कार्यक्रम भी सियासी शक्ति प्रदर्शन का रूप लेते नजर आ रहे हैं।

मंगलवार की यह घटना साफ संकेत देती है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और टकराव और तेज हो सकता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता शांति व्यवस्था बनाए रखना है, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
एग्रा में हुए इस विरोध ने यह जरूर दिखा दिया कि क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ चुकी है और जनता की अपेक्षाएं भी अपने प्रतिनिधियों से कम नहीं हैं। अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद दोनों पक्ष किस तरह की रणनीति अपनाते हैं और जनता के बीच अपनी बात कैसे रखते हैं।















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