पश्चिम बर्धमान/आसनसोल : श्रम संहिताओं के विरोध में घोषित देशव्यापी औद्योगिक बंद के बीच गुरुवार को आसनसोल में एक स्थान पर हालात तनावपूर्ण हो गए। बीएनआर मोड़ स्थित एक सरकारी बैंक शाखा के सामने वामपंथी ट्रेड यूनियनों से जुड़े कार्यकर्ता सुबह से ही धरना देकर पिकेटिंग कर रहे थे। प्रदर्शन के कारण बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को भीतर जाने में कठिनाई होने लगी, जिससे नियमित कामकाज प्रभावित हुआ।

स्थिति की सूचना मिलते ही आसनसोल दक्षिण थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने और बैंक की गतिविधियां सामान्य रखने का आग्रह किया। इस दौरान यूनियन नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे श्रमिकों की आवाज उठा रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन का तर्क था कि आवश्यक सेवाओं में बाधा नहीं आने दी जा सकती।
कुछ देर तक चले गतिरोध के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कर्मचारियों को बैंक परिसर में प्रवेश कराया। इसके बाद शाखा में लेन-देन की प्रक्रिया शुरू हो सकी। हालांकि, बैंक के बाहर नारेबाजी का दौर कुछ समय तक जारी रहा, जिससे क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुट गई और माहौल गरम बना रहा।
औद्योगिक इकाइयों में सामान्य गतिविधि
जहां बीएनआर मोड़ पर प्रदर्शन को लेकर हलचल रही, वहीं आसनसोल के कई औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कामकाज सामान्य रूप से चलता दिखा। कुछ जगहों पर श्रमिक संगठनों ने समर्थन जताया, लेकिन उत्पादन पर व्यापक असर नहीं पड़ा। बाजारों में भी आंशिक उपस्थिति रही और यातायात सामान्य बना रहा।
दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बुलाए गए इस बंद के तहत सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैंक के सामने जुटे कार्यकर्ताओं ने श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को श्रमिक हितों के प्रतिकूल बताया और उन्हें वापस लेने की मांग दोहराई।

नेताओं ने लगाए आरोप
मौके पर मौजूद वामपंथी नेता पार्थ मुखर्जी ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि प्रशासन ने आंदोलन को कमजोर करने की नीयत से दबाव बनाया और लगाए गए बैनर हटाए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
मुखर्जी ने यह भी कहा कि आसनसोल की पहचान मजदूर आंदोलनों से जुड़ी रही है और यहां आवाज उठाने वालों को डराया नहीं जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
श्रम संहिताओं पर मतभेद
नए श्रम कोड को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इन प्रावधानों से नौकरी की सुरक्षा कमजोर होगी और छंटनी आसान हो जाएगी। उनका आरोप है कि इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और संगठित श्रमिक वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि ये सुधार उद्योगों को सरल नियमों के तहत संचालित करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से लाए गए हैं। सरकार का दावा है कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी।
प्रशासन सतर्क
गुरुवार को हुई घटनाओं के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं है, लेकिन आवश्यक सेवाओं में व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, मगर राजनीतिक बयानबाजी से वातावरण में तल्खी बनी हुई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि श्रम संहिताओं को लेकर जारी विरोध आगे किस रूप में सामने आता है और औद्योगिक शहर आसनसोल में इसका प्रभाव कितना गहराता है।















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