एडमिट कार्ड भूला छात्र, ट्रैफिक पुलिस ने बचाया वर्ष

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आसनसोल :  गुरुवार को शुरू हुई उच्च माध्यमिक परीक्षा का पहला दिन एक छात्र और उसके परिवार के लिए भारी तनाव लेकर आया, लेकिन ट्रैफिक पुलिस की तत्परता ने पल भर में हालात बदल दिए। समय के खिलाफ चल रही इस दौड़ में पुलिस की मानवीय पहल ने न केवल छात्र का भविष्य सुरक्षित किया, बल्कि समाज के सामने संवेदनशील व्यवस्था की मिसाल भी पेश की।

एनसी क्षेत्र के रहने वाले सायन चटर्जी परीक्षा देने के लिए घर से निकलने ही वाले थे कि अचानक उन्हें याद आया—एडमिट कार्ड घर पर नहीं, बल्कि गांव में छूट गया है। परीक्षा का समय तेजी से नजदीक आ रहा था। बिना प्रवेश पत्र के केंद्र में बैठना संभव नहीं था। परिवार में अफरा-तफरी मच गई। समझ नहीं आ रहा था कि इतनी कम अवधि में एडमिट कार्ड कैसे लाया जाए।

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समय कम, चिंता ज्यादा

सायन और उनके परिजन बेहद परेशान थे। साल भर की तैयारी दांव पर लगी दिख रही थी। इसी बीच किसी परिचित के माध्यम से सूचना आसनसोल नॉर्थ ट्रैफिक गार्ड के प्रभारी अधिकारी संजय कुमार भागा तक पहुंची। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत मदद का फैसला किया।

पुलिस की तत्परता आई काम

संजय कुमार भागा ने बिना औपचारिकता में समय गंवाए छात्र को अपने वाहन में बैठाया और तेजी से इथुरा गांव की ओर रवाना हो गए, जहां से एडमिट कार्ड लाना था। रास्ते में यातायात की चुनौतियां थीं, लेकिन अधिकारी की प्राथमिकता स्पष्ट थी—छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं होने देना।

आवश्यक दस्तावेज मिलते ही वे तुरंत परीक्षा केंद्र की ओर लौटे। उनकी सक्रियता का नतीजा यह रहा कि सायन समय रहते केंद्र पहुंच गया। परीक्षा शुरू होने से पहले प्रवेश मिल गया और वह सामान्य रूप से परीक्षा में बैठ सका।

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परिवार ने ली राहत की सांस

जैसे ही यह खबर परिवार तक पहुंची, सबने राहत महसूस की। परिजनों का कहना था कि अगर थोड़ी भी देर हो जाती, तो एक साल की मेहनत बेकार चली जाती। उन्होंने ट्रैफिक अधिकारी का आभार जताते हुए कहा कि पुलिस का ऐसा रूप हमेशा याद रखा जाएगा।

लोगों ने की सराहना

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के इलाकों में चर्चा शुरू हो गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अक्सर पुलिस को केवल नियम लागू करने वाली सख्त संस्था के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस घटना ने दिखा दिया कि जरूरत पड़ने पर वही पुलिस परिवार की तरह साथ खड़ी होती है।

कई लोगों ने कहा कि इस तरह की पहल से आम जनता और पुलिस के बीच भरोसा मजबूत होता है। विद्यार्थियों के लिए भी यह संदेश है कि प्रशासन उनकी मदद के लिए तत्पर है।

मिसाल बन गई घटना

गुरुवार को परीक्षा के पहले दिन घटी यह घटना अब प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय—इन तीनों ने मिलकर एक छात्र का साल बचा लिया।

आसनसोल में ट्रैफिक पुलिस की यह पहल लंबे समय तक याद रखी जाएगी। लोगों का मानना है कि यदि हर विभाग इसी तरह मानवीय दृष्टिकोण अपनाए, तो कई परेशानियां अपने आप कम हो सकती हैं।

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