आसनसोल : शनिवार को शहर का व्यस्त हटन रोड अचानक राजनीतिक विरोध का मंच बन गया। यातायात अव्यवस्था से नाराज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और चक्का जाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि हटन रोड मोड़ पर प्रतिदिन भीषण जाम की स्थिति बनती है। स्थानीय दुकानदारों, स्कूली बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और मरीजों को घंटों फंसना पड़ता है। कई बार पुलिस और ट्रैफिक विभाग से शिकायत की गई, ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं होगा, तब तक लोगों की परेशानी कम नहीं होगी।
धरने का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता शाह आलम और प्रसनजीत पाईटुंडी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा के लिए किया जा रहा है। उनका कहना था कि जाम की वजह से कई बार एंबुलेंस तक रास्ता नहीं बना पाती, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन कब जागेगा और कब स्थायी समाधान सामने आएगा।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई, ट्रैफिक पुलिस की संख्या बढ़ाने और भीड़भाड़ वाले समय में विशेष प्रबंधन लागू करने की मांग रखी। उनका कहना था कि सड़क के किनारे अनियंत्रित तरीके से खड़े वाहनों के कारण समस्या और विकराल हो जाती है। यदि नियमित निगरानी हो तो हालात काफी हद तक सुधर सकते हैं।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित विभागों के साथ बैठक कर व्यावहारिक समाधान तलाशा जाएगा। हालांकि, आंदोलनकारी तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

इधर, जाम में फंसे कई वाहन चालकों ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि समस्या के समाधान के लिए आंदोलन जरूरी हो सकता है, लेकिन अचानक सड़क रोक देने से आम लोगों को ही अधिक परेशानी होती है। कुछ लोगों ने प्रशासन से अपील की कि बाजार क्षेत्र में यातायात को लेकर दीर्घकालिक योजना बनाई जाए।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि हटन रोड शहर की जीवनरेखा जैसा है, जहां दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। त्योहारों और बाजार के दिनों में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक ढंग से ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था और सख्ती जरूरी है।
करीब कुछ समय बाद पुलिस की पहल पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया गया, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
शनिवार की यह हलचल आने वाले दिनों में शहर की राजनीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं दोनों पर असर डाल सकती है। फिलहाल, आम नागरिक यही उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें जाम की समस्या से जल्द राहत मिले।















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