कोयला तस्करी पर शिकंजा, सौ करोड़ की संपत्ति कुर्क

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आसनसोल : राज्य में अवैध खनन और कोयले की तस्करी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कार्रवाई तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने एक और बड़ी कुर्की की है। एजेंसी ने करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उन कंपनियों के खिलाफ की गई है, जिन्हें जांच में इस अवैध कारोबार से लाभान्वित होने वाला बताया गया है।

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ईडी के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में अचल परिसंपत्तियां, बैंक जमा और निवेश योजनाएं शामिल हैं। जिन प्रमुख कंपनियों का नाम सामने आया है, उनमें शाकंबरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड तथा गगन फेरोटेक लिमिटेड प्रमुख हैं। एजेंसी का कहना है कि वित्तीय लेनदेन की परतें खोलने पर यह संकेत मिले कि अवैध रूप से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से वैध बनाने की कोशिश की गई।

जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि अब तक इस प्रकरण में 322 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। मामला उन इलाकों से जुड़ा है जहां ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के पट्टे पर खनन होता है। आरोप है कि इन क्षेत्रों से कोयला चोरी कर संगठित तरीके से दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जाता था और इस पूरी प्रक्रिया में एक सुव्यवस्थित नेटवर्क सक्रिय था।

ईडी द्वारा अदालत में पेश रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित तौर पर प्रत्येक टन कोयले पर एक तय रकम वसूली जाती थी। सूत्र बताते हैं कि बिना वैध कागजात वाले वाहनों से यह राशि तथाकथित ‘प्रवेश शुल्क’ के रूप में ली जाती थी। एक वाहन में औसतन कई दर्जन टन कोयला होता था और प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही से रकम करोड़ों में पहुंच जाती थी।

एजेंसी को संदेह है कि इस अवैध वसूली में आपराधिक तत्वों के साथ-साथ कुछ प्रभावशाली लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि स्थानीय स्तर पर संरक्षण उपलब्ध कराया जाता था, जिससे ट्रकों की निर्बाध आवाजाही बनी रहे। ईडी ने वित्तीय दस्तावेजों, बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक यह तंत्र लंबे समय तक सक्रिय रहा। इस दौरान न केवल खनिज संपदा की चोरी हुई, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा। एजेंसी का मानना है कि फर्जी कागजात और परिवहन दस्तावेज तैयार कर वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाया जाता था, जिससे निगरानी तंत्र को भ्रमित किया जा सके।

कार्रवाई के बाद संबंधित व्यावसायिक समूहों और अन्य व्यक्तियों पर कानूनी दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप साबित होते हैं, तो आगे और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें अतिरिक्त कुर्की, पूछताछ और गिरफ्तारी भी शामिल हो सकती है।

वहीं, राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार पर प्रहार बता रहा है, जबकि अन्य पक्ष जांच की निष्पक्षता पर नजर रखने की बात कह रहे हैं। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और एजेंसियों की आगे की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।

फिलहाल ईडी ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और तस्करी से अर्जित धन को वैध बनाने की किसी भी कोशिश को बख्शा नहीं जाएगा। एजेंसी का कहना है कि वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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