आसनसोल : शनिवार को शहर का आसनसोल जिला पुस्तकालय परिसर उस समय कर्मियों की आवाज़ से गूंज उठा, जब पश्चिम बंगाल राज्य सरकारी कर्मचारी फेडरेशन की पश्चिम बर्धमान इकाई ने जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से आए कर्मचारियों, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सम्मेलन का केंद्र बिंदु सेवा संबंधी लंबित समस्याएं, वेतन संरचना और कार्यस्थल की बुनियादी सुविधाएं रहीं।

सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में राज्य के श्रम एवं कानून मंत्री मलय घटक मौजूद थे। उनके पहुंचते ही कर्मचारियों ने तालियों के साथ स्वागत किया और अपनी अपेक्षाएं खुलकर सामने रखीं। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी तंत्र की मजबूती कर्मचारियों की संतुष्टि से जुड़ी होती है, इसलिए उनकी व्यावहारिक परेशानियों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
विभिन्न विभागों से आए प्रतिनिधियों ने वेतन विसंगतियों को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना था कि समान जिम्मेदारी निभाने के बावजूद वेतनमान में अंतर बना हुआ है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। पदोन्नति की प्रक्रिया में देरी, रिक्त पदों पर भर्ती न होने और पेंशन से जुड़े मामलों में फाइलों का अटकना भी चर्चा का विषय रहा। कर्मचारियों ने कहा कि इन समस्याओं का असर न केवल उनके मनोबल पर पड़ता है, बल्कि दफ्तरों के कामकाज पर भी दिखाई देता है।
सम्मेलन में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि वे इन मांगों को उचित मंच तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे। कई वक्ताओं ने संवाद की निरंतरता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल से ही व्यवस्था सुचारु रह सकती है।

मंत्री मलय घटक ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार कर्मियों की भूमिका को भली-भांति समझती है। उन्होंने माना कि कुछ मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं के तहत उनका समाधान निकालने की कोशिश जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सम्मेलन में उठाए गए हर बिंदु पर संबंधित विभागों के साथ समीक्षा की जाएगी और जहां संभव होगा, त्वरित कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संगठन की मजबूती उसके कर्मचारियों से होती है। यदि कर्मचारी संतुष्ट रहेंगे तो जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। मंत्री के इस वक्तव्य पर सभागार में मौजूद लोगों ने समर्थन जताया।
बैठक के अंत में फेडरेशन के नेताओं ने निर्णय लिया कि सभी प्रमुख मांगों को समाहित करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन तैयार किया जाएगा। यह ज्ञापन विभागीय अधिकारियों को सौंपा जाएगा, ताकि समस्याओं के निराकरण की दिशा में ठोस पहल हो सके। नेताओं का कहना था कि यह सम्मेलन एकजुटता का संदेश देता है और कर्मचारियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा भी।
कई कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि इस बार मिले आश्वासन महज औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर परिणाम भी दिखेंगे। उनका मानना है कि यदि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई शुरू होती है तो व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव संभव है।
शनिवार का यह आयोजन संवाद की नई राह खोलने वाला माना जा रहा है। कर्मचारियों को विश्वास है कि उनकी आवाज अब और मजबूती से सुनी जाएगी तथा समाधान की दिशा में ठोस कदम उठेंगे।















Users Today : 39
Users Yesterday : 54