रानीगंज : मंगलवार को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच रानीगंज के चर्चित चिकित्सक एवं 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे डॉ. बिजॉन मुखर्जी ने रानीगंज विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत हरिशपुर गांव का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना और आगामी चुनाव में लोकतांत्रिक भागीदारी का आह्वान किया।

हरिशपुर वही गांव है, जिसने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार कर राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा था। ग्रामीणों का आरोप था कि क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन से कई घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे लोगों को भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्थिति की गंभीरता के बावजूद प्रशासन की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की गई।
मंगलवार को आयोजित सभा में ग्रामीणों ने एक बार फिर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने और पुनर्वास की मांग रखने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2021 में चुनाव बहिष्कार का निर्णय इसी कथित उपेक्षा के विरोध में लिया गया था। गांव के लोगों का कहना है कि उनके लिए सुरक्षित आवास और स्थायी पुनर्वास सर्वोपरि है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने कहा कि चुनावों का बहिष्कार किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने ग्रामीणों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि मतदान ही वह माध्यम है, जिसके जरिए जनता अपनी आवाज प्रभावी ढंग से उठा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी करेंगे, तभी उनकी समस्याएं व्यापक स्तर पर उठाई जा सकेंगी।
डॉ. मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य में भाजपा की सरकार नहीं है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर सीधे हस्तक्षेप की सीमाएं हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि आगामी चुनाव में भाजपा को सत्ता मिलती है, तो हरिशपुर के भूस्खलन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गांव की स्थिति वास्तव में चिंताजनक है और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि विकास और पुनर्वास के मुद्दे राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर होने चाहिए। उनका कहना था कि जनता की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को संबंधित मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने भी सकारात्मक संकेत दिए। कई लोगों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होता है, तो वे इस बार मतदान प्रक्रिया में भाग लेने पर पुनर्विचार कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वास के बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2021 में मतदान बहिष्कार के कारण हरिशपुर गांव चर्चा का केंद्र बना था। इस बार यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गांव के मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते हैं या फिर अपनी मांगों के समर्थन में कोई नया रुख अपनाते हैं।
मंगलवार के इस दौरे ने क्षेत्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। डॉ. बिजॉन मुखर्जी ने अंत में कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भयमुक्त वातावरण में जीवन जीना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।















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