कोयला तस्करी मामले में लाला ईडी हिरासत

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नई दिल्ली/कोलकाता :  मंगलवार को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी प्रकरण में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय को बड़ी कानूनी सफलता प्राप्त हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी अनूप माजी उर्फ ‘लाला’ को दो सप्ताह के लिए ईडी की हिरासत में लेकर पूछताछ करने की अनुमति प्रदान कर दी। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी को तथ्यों की तह तक पहुंचने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाना आवश्यक है।

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अब तक आरोपी को शीर्ष अदालत से गिरफ्तारी से संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते एजेंसी उसे हिरासत में नहीं ले पा रही थी। हालांकि जुलाई 2025 में उसकी अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी गई थी। जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मंगलवार को अदालत ने ईडी को कस्टडी प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

अनूप माजी की कहानी पश्चिम बंगाल के कोयला बेल्ट से जुड़ी उस काली दुनिया को उजागर करती है, जिसकी चर्चा लंबे समय से होती रही है। पुरुलिया जिले के एक सामान्य परिवार से आने वाला यह व्यक्ति कभी छोटे स्तर पर मछली व्यवसाय से जुड़ा था। बाद में रोजगार की तलाश में वह आसनसोल क्षेत्र पहुंचा और धीरे-धीरे अवैध कोयला कारोबार के जाल में सक्रिय हो गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने कुछ प्रभावशाली तत्वों की मिलीभगत से अवैध खनन और परिवहन का संगठित नेटवर्क खड़ा किया।

ईडी और सीबीआई के दावों के अनुसार, इस सिंडिकेट ने कथित रूप से कोल कंपनियों, सुरक्षा बलों और परिवहन तंत्र से जुड़े कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के सहयोग से अवैध खनन को अंजाम दिया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी चालान और तथाकथित ‘टोकन प्रणाली’ के माध्यम से ट्रकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाती थी। आरोप है कि 10 और 20 रुपये के नोटों का विशेष पहचान संकेत के रूप में उपयोग किया जाता था, जिससे अवैध कोयले की ढुलाई बिना किसी बाधा के होती रहे।

जांच के दौरान अब तक लगभग 2,742 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय का आकलन किया गया है। ईडी ने हाल ही में 100.44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति कुर्क की है। इसके साथ ही इस प्रकरण में अब तक जब्त की गई कुल संपत्ति 322.71 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। एजेंसी का कहना है कि अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए हवाला नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ इस्पात और लोहा कंपनियों पर भी नकद भुगतान कर अवैध कोयला खरीदने के आरोप लगाए गए हैं।

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मामले में लाला के कथित सहयोगी विनय मिश्रा अब भी फरार बताए जा रहे हैं, जबकि एक अन्य आरोपी जयदेव मंडल को पूर्व में जमानत मिल चुकी है। अब जब मुख्य आरोपी ईडी की हिरासत में होगा, तो जांच एजेंसी को वित्तीय लेनदेन, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत जैसे पहलुओं की गहराई से पड़ताल करने का अवसर मिलेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मंगलवार का यह आदेश जांच की दिशा तय करने में निर्णायक सिद्ध हो सकता है। हिरासत के दौरान एजेंसी आरोपी से आमने-सामने पूछताछ कर सकती है और डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों तथा कथित हवाला चैनलों की कड़ियों को जोड़ सकती है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि जांच के दौरान राज्य और जिला स्तर के कुछ प्रभावशाली नामों के सामने आने की चर्चा पहले से होती रही है। हालांकि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता तब तक सिद्ध नहीं मानी जा सकती, जब तक न्यायालय में आरोप प्रमाणित न हो जाएं।

मंगलवार को आए इस न्यायिक आदेश ने कोयला तस्करी प्रकरण को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दो सप्ताह की हिरासत के दौरान जांच एजेंसी कौन-कौन से नए तथ्य उजागर करती है और यह प्रकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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