आसनसोल : मंगलवार को आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल ने अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने हाल ही में विधानसभा में दिए गए अपने बयान को लेकर उठे विवाद पर भी विस्तार से सफाई दी और कहा कि उनके वक्तव्य को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

विधायक ने कहा कि उन्होंने अल्पसंख्यक समाज के संदर्भ में जो बातें कहीं थीं, उनका उद्देश्य किसी समुदाय को आहत करना नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति को उजागर करना था। उनका आरोप था कि पिछले पंद्रह वर्षों से ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य में सरकार चल रही है, लेकिन इस दौरान अल्पसंख्यक समाज के समग्र विकास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार यह स्पष्ट करे कि इन वर्षों में अल्पसंख्यक समुदाय से कितने युवक-युवतियां डॉक्टर, इंजीनियर अथवा प्रशासनिक सेवाओं जैसे उच्च पदों पर पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा है। विधायक का आरोप था कि शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने विधानसभा के भीतर इन्हीं मुद्दों को उठाया था, जिसे राजनीतिक रंग दिया गया।
मंगलवार को आयोजित इस वार्ता में विधायक ने कुछ अन्य नेताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य की राजनीति में कुछ दल और नेता परोक्ष रूप से सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राज्य की राजनीति में वैचारिक स्पष्टता का अभाव है और आम जनता के मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।
रोजगार के विषय पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में अग्निमित्रा पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य अक्सर यह दावा करती हैं कि प्रदेश में युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार सृजित किए गए हैं। यदि ऐसा है, तो फिर राज्य सरकार की ‘जुबो साथी’ योजना में नामांकन के लिए युवाओं की लंबी कतारें क्यों दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि भत्ता प्राप्त करने के लिए युवाओं का इस प्रकार पंक्तिबद्ध होना इस बात का संकेत है कि स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं कराए गए।

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि ‘जुबो साथी’ योजना के तहत आवेदन करने वाले कई युवाओं को दस्तावेज जमा करने के बाद कोई रसीद नहीं दी जा रही है। ऐसे में उनके पास यह प्रमाण ही नहीं रहता कि उन्होंने आवेदन किया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न बताते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे युवाओं के साथ किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
औद्योगिक विकास के मुद्दे पर भी उन्होंने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि प्रत्येक वर्ष निवेश आकर्षित करने के लिए भव्य सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं, किंतु अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वास्तव में कितना निवेश धरातल पर उतरा और कितने नए उद्योग स्थापित हुए। उन्होंने मांग की कि सरकार श्वेत पत्र जारी कर वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करे।
शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए विधायक ने कहा कि राज्य में शैक्षणिक ढांचा कमजोर हुआ है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा के स्तर में गिरावट के कारण ही प्रदेश के छात्र-छात्राएं प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
संवाददाता सम्मेलन के अंत में उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी टिप्पणी की। उनका आरोप था कि सत्तारूढ़ दल में टिकट वितरण को लेकर पारदर्शिता नहीं है और आर्थिक लेन-देन की चर्चाएं आम हैं। हालांकि, इन आरोपों पर सत्तारूढ़ दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मंगलवार की इस प्रेस वार्ता ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और आगामी दिनों में यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है।















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