रानीगंज : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच गुरुवार को रानीगंज के साहेब बांध क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां एक सार्वजनिक डस्टबिन से 25 से अधिक मतदाता पहचान पत्र बरामद होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने सभी पहचान पत्र जब्त कर जांच प्रारंभ कर दी है।

घटना गुरुवार सुबह उस समय प्रकाश में आई जब कुछ स्थानीय निवासियों ने साहेब बांध के समीप स्थित कूड़ेदान में कई प्लास्टिक कार्ड बिखरे देखे। पास जाकर देखने पर स्पष्ट हुआ कि वे मतदाता पहचान पत्र हैं। सूचना फैलते ही आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने आशंका जताई कि यह मामला सामान्य लापरवाही का नहीं, बल्कि किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
मौके पर पहुंचे एक स्थानीय निवासी ने बताया कि डस्टबिन में पड़े पहचान पत्रों में से एक उनके नाम का भी था। उन्होंने कहा कि उनका मूल मतदाता पहचान पत्र सुरक्षित रूप से घर में रखा हुआ है और उन्होंने कभी भी उसे कहीं जमा नहीं किया। ऐसे में उनके नाम से दूसरा कार्ड यहां मिलना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि कहीं उनके दस्तावेज का दुरुपयोग तो नहीं किया गया। यह स्थिति मतदाता पहचान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है।
सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और सभी कार्डों को विधिवत जब्त कर लिया। प्रारंभिक स्तर पर कार्डों की संख्या 25 से अधिक बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद दस्तावेजों की सत्यता, उनके जारी होने की प्रक्रिया तथा संबंधित क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ये कार्ड यहां तक कैसे पहुंचे।
घटनास्थल पर पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता आरिज जलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पुराने मतदाता पहचान पत्र के स्थान पर डिजिटल कार्ड जारी किए जा रहे हैं। यदि किसी कारणवश पुराने कार्ड वापस लिए भी जाते हैं, तो उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट किया जाता है। इस प्रकार सार्वजनिक डस्टबिन में फेंक देना नियमों के विपरीत है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

दूसरी ओर, बोरो चेयरमैन मुजम्मिल शहजादा भी सूचना मिलते ही स्थल पर पहुंचे। उन्होंने डस्टबिन में आवश्यक सरकारी दस्तावेजों के पाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों के चुनावों में बाहरी मतदाताओं के नाम पर मतदान कराने जैसी घटनाएं सामने आई हैं और आशंका जताई कि बंगाल में भी ऐसी कोशिशें की जा सकती हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया कि राज्य में ऐसी किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
मुजम्मिल शहजादा ने यह भी कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भी मतदाता सूची में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार, एक मतदाता पहचान पत्र के क्रमांक का उपयोग कर दूसरे क्षेत्र में कार्ड तैयार किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यदि रानीगंज की घटना में भी ऐसा कोई तत्व पाया जाता है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला होगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस प्रशासन से बातचीत हो चुकी है और विस्तृत जांच का आग्रह किया गया है। साथ ही संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से भी संपर्क कर यह जानकारी ली जाएगी कि बरामद कार्ड किन क्षेत्रों के हैं, कब जारी हुए और किन परिस्थितियों में निरस्त या परिवर्तित किए गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की तह तक जाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो निर्वाचन विभाग से भी औपचारिक जानकारी मांगी जाएगी। फिलहाल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
इस घटना ने मतदाता पहचान पत्रों की सुरक्षा और वितरण प्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। लोकतंत्र में मतदाता पहचान पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में सार्वजनिक स्थान पर बड़ी संख्या में इनका मिलना स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय है।
अब सभी की नजर पुलिस और संबंधित विभागों की जांच पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि है या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश। तब तक रानीगंज में इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।















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