आसनसोल : सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी अंतिम सूची ने शहर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सामने आई जानकारी के अनुसार, डिप्टी मेयर वसीमुल हक का नाम भी उन मामलों में शामिल है, जिन्हें एडजुडिकेशन प्रक्रिया के तहत विचाराधीन रखा गया है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा को तेज कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में संपन्न विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान कई मतदाताओं के नामों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित मामलों को जांच और सुनवाई के लिए चिह्नित किया गया। इसी क्रम में डिप्टी मेयर का नाम भी विचाराधीन सूची में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से आधिकारिक रूप से किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।
चुनाव विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जिन भी नामों पर आपत्ति प्राप्त हुई है, उनकी नियमानुसार जांच की जा रही है। दस्तावेजों का सत्यापन, निवास प्रमाण और अन्य आवश्यक कागजातों की समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों का निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से निपटारा किया जाएगा तथा चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
डिप्टी मेयर वसीमुल हक ने इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे तीन बार के जनप्रतिनिधि रह चुके हैं और ऐसे में उनका नाम विचाराधीन सूची में आना आश्चर्यजनक है। उन्होंने बताया कि उन्होंने समय पर सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे और सुनवाई की प्रक्रिया में भी भाग लिया था। इसके बावजूद उनका नाम विचाराधीन श्रेणी में रखा जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इससे यह जानने की आवश्यकता है कि चुनावी प्रक्रिया किस प्रकार संचालित की जा रही है।

वसीमुल हक ने यह भी कहा कि वे कानून और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं तथा उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद उनका नाम यथावत सूची में बना रहेगा। उन्होंने किसी प्रकार की राजनीतिक साजिश से इनकार नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि आम मतदाताओं का भरोसा बना रहे।
इस मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया, जबकि अन्य ने इसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी विवाद स्वाभाविक रूप से संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव चुनावी गणित पर पड़ सकता है।
फिलहाल, सभी की नजरें एडजुडिकेशन प्रक्रिया के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। यह निर्णय तय करेगा कि डिप्टी मेयर का नाम मतदाता सूची में यथावत रहेगा या उसमें कोई संशोधन किया जाएगा। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
सोमवार को सामने आया यह मामला दर्शाता है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील होती है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण का अंतिम निष्कर्ष शहर की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।















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