दुर्गापुर : दुर्गापुर स्टील प्लांट (डीएसपी) एम्प्लॉइज कंज्यूमर को-ऑपरेटिव सोसाइटी में नई प्रबंधन समिति के गठन के साथ ही कथित अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। सोसाइटी के केरोसिन विभाग से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि टाउनशिप के आर्थिक रूप से कमजोर निवासियों के लिए आवंटित हजारों लीटर केरोसिन तेल का सही ढंग से वितरण नहीं किया गया और इसमें गबन की आशंका जताई जा रही है।

इस मामले में केरोसिन विभाग के प्रभारी निदेशक शंकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने बिना किसी औपचारिक सूचना और प्रक्रिया का पालन किए स्वयं हस्ताक्षर कर बड़ी मात्रा में केरोसिन तेल का उठाव कराया। बताया जा रहा है कि यह तेल उखड़ा क्षेत्र के एक अधिकृत डीलर से लिया गया था, लेकिन उसके बाद वह निर्धारित गोदाम या वितरण केंद्रों तक नहीं पहुंचा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्गापुर स्टील टाउनशिप के अंतर्गत संचालित दस वितरण केंद्रों तक यह तेल नहीं पहुंच पाया। इससे स्थानीय उपभोक्ताओं में असंतोष और संदेह की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सूत्रों का कहना है कि जनवरी माह में केरोसिन का उठाव नहीं किया गया था, जबकि फरवरी में कीमतों में कमी आने के बाद दो चरणों में लगभग 16 हजार लीटर केरोसिन उठाया गया।

बताया गया है कि पहले चरण में काजोड़ा स्थित गुप्ता ऑटोमोबाइल्स नामक डीलर से लगभग 4,062 लीटर केरोसिन लिया गया, जबकि दूसरे चरण में लगभग 12 हजार लीटर तेल का उठाव किया गया। आरोप यह भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में केरोसिन का वितरण टाउनशिप के डिपुओं में नहीं किया गया और इसे खुले बाजार में बेचकर निजी लाभ कमाने की कोशिश की गई।
मामले के सामने आने के बाद कंज्यूमर को-ऑपरेटिव सोसाइटी के बोर्ड ने इसे गंभीरता से लिया है। सोसाइटी के पदाधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आरोपी निदेशक को नोटिस जारी किया है। उन्हें सात दिनों के भीतर लिखित रूप से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उठाए गए केरोसिन की पूरी मात्रा आखिर कहां गई और उसका वितरण किस प्रकार किया गया।

को-ऑपरेटिव सोसाइटी के महासचिव नंदकिशोर घोष बैराग्य ने बताया कि जब कथित रूप से केरोसिन का उठाव किया गया, उस समय वे कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। उन्होंने कहा कि तेल का उठाव होने की जानकारी बाद में मिली, लेकिन वह गोदाम तक नहीं पहुंचा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आवश्यक होने पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए शंकर सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि जनवरी माह का कोटा शेष रह जाने के कारण फरवरी में अतिरिक्त मात्रा में केरोसिन उठाया गया था। उनके अनुसार तेल को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न डिपुओं में भेजने की प्रक्रिया चल रही है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।
इस बीच इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। दुर्गापुर पश्चिम के भाजपा विधायक लक्ष्मण घोड़ुई ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गरीबों के लिए केरोसिन उपलब्ध कराने के लिए धन उपलब्ध करा रही है, लेकिन राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण उसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
विधायक ने कहा कि यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता सब देख रही है और भ्रष्टाचार के खिलाफ उचित समय पर अपना जवाब देगी।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। को-ऑपरेटिव सोसाइटी के अधिकारी मामले से जुड़े दस्तावेजों और वितरण व्यवस्था की पड़ताल कर रहे हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि केरोसिन आपूर्ति में वास्तव में अनियमितता हुई है या नहीं। इस घटना ने दुर्गापुर स्टील टाउनशिप में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।















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