दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर थाना क्षेत्र अंतर्गत छत्रिशगंडा इलाके में शनिवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब कुछ बाहरी लोगों की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया। स्थानीय लोगों ने चार महिलाओं और तीन पुरुषों सहित कुल सात लोगों को रोककर पूछताछ की और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया।

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों के अपहरण से जुड़ी अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। इसी कारण लोगों में सतर्कता भी बढ़ गई है। शनिवार सुबह जब गांव में कुछ अपरिचित लोग घूमते हुए दिखाई दिए तो स्थानीय निवासियों को संदेह हुआ और उन्होंने उन्हें रोककर पूछताछ शुरू कर दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय एक टोटो वाहन से कुछ पुरुष और महिलाएं गांव में पहुंचे थे। वे गांव की गलियों में इधर-उधर घूमते नजर आए, जिससे ग्रामीणों को शक हुआ। कुछ लोगों ने उन्हें पहले कभी इलाके में नहीं देखा था, इसलिए उनकी गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जब ग्रामीणों ने उन लोगों से बातचीत की तो उनके जवाबों में स्पष्टता नहीं थी। बातचीत के दौरान कई बार उनके बयान बदलते नजर आए, जिससे संदेह और गहरा गया। इसके बाद ग्रामीणों ने एहतियात के तौर पर सभी सातों व्यक्तियों को रोककर रखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद पांडवेश्वर पुलिस थाना की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रारंभिक पूछताछ के बाद सभी संदिग्धों को अपने साथ थाने ले जाकर आगे की जांच शुरू कर दी।

स्थानीय निवासी देवज्योति गड़ि ने बताया कि बाहरी लोगों की गतिविधियां काफी संदिग्ध लग रही थीं। उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान उन लोगों ने खुद को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का निवासी बताया। उनके पास कुछ पहचान पत्र भी थे, लेकिन उनकी बातों और दस्तावेजों के बीच कई विसंगतियां नजर आईं, जिससे ग्रामीणों का संदेह और बढ़ गया।
देवज्योति गड़ि ने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न स्थानों पर बच्चों के अपहरण की अफवाहें फैलने के कारण लोग पहले से अधिक सतर्क हो गए हैं। इसलिए ग्रामीणों ने किसी भी तरह का जोखिम लेने के बजाय तुरंत प्रशासन को सूचना देना ही उचित समझा।
दूसरी ओर, पकड़े गए व्यक्तियों में से एक ने बताया कि वे लोग हर वर्ष इस इलाके में आते हैं और भीख मांगकर अपना जीवन यापन करते हैं। उनका कहना था कि वे पहले भी कई बार यहां आ चुके हैं, लेकिन इस बार पहली बार ऐसा हुआ जब लोगों ने उन्हें पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में अब तक किसी भी आपराधिक गतिविधि का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच जारी है। अधिकारियों ने कहा कि पहचान पत्रों और अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर तुरंत विश्वास न करें और कानून अपने हाथ में लेने से बचें। यदि किसी भी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
इस घटना के बाद छत्रिशगंडा और आसपास के क्षेत्रों में कुछ समय तक लोगों की भीड़ जमा रही। हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को शांतिपूर्वक नियंत्रित कर लिया गया और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि समाज में अफवाहों के कारण कई बार अनावश्यक तनाव की स्थिति बन जाती है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने के साथ-साथ संयम भी बनाए रखना चाहिए।
फिलहाल पुलिस सातों व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है और उनके आने के वास्तविक उद्देश्य का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वे वास्तव में किस कारण से इलाके में आए थे। तब तक प्रशासन ने लोगों से शांति और सहयोग बनाए रखने की अपील की है।















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