कोलकाता/आसनसोल : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार में किए गए एक अहम प्रशासनिक बदलाव के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कानून विभाग अपने पास रख लिया है। इसके साथ ही राज्य के मंत्री और आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक मलय घटक से कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इस निर्णय के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार यह निर्णय हाल ही में लिया गया है और इसकी जानकारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से इस विषय में अभी तक कोई औपचारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है। फिर भी राजनीतिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं।
मलय घटक लंबे समय से राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। वे श्रम विभाग के साथ-साथ कानून मंत्रालय का भी कार्यभार संभाल रहे थे। कानून मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल काफी लंबा रहा है और इस दौरान उन्होंने कई प्रशासनिक तथा विधिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब कानून विभाग वापस लिए जाने के बाद वे फिलहाल श्रम विभाग की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह का बदलाव कई तरह के संकेत दे सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस कदम को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि हाल के कुछ घटनाक्रमों के कारण मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया है।
सूत्रों के मुताबिक राज्य बार काउंसिल से जुड़े चुनावी मामलों को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि इन घटनाओं से संबंधित परिस्थितियों के कारण सरकार के भीतर असंतोष की स्थिति बनी थी। हालांकि इन अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है।
गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब मलय घटक के मंत्रालयों में बदलाव किया गया हो। इससे पहले भी राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान उनसे कुछ विभाग वापस लिए जा चुके हैं। उस समय वे कुछ अवधि तक बिना विभाग के मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके थे। बाद में परिस्थितियां सामान्य होने पर उन्हें पुनः महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी।

इस बार हुए इस बदलाव को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आया है। ऐसे समय में किसी मंत्री के विभाग में बदलाव को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। विशेष रूप से आसनसोल और पश्चिम बर्दवान क्षेत्र में इस निर्णय को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्य की राजनीति में इस फैसले का प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। यह भी देखा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने फिलहाल कानून विभाग अपने पास ही रखा है, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार इस विभाग को लेकर विशेष सतर्कता बरतना चाहती है।
अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि भविष्य में कानून विभाग की जिम्मेदारी किसी अन्य मंत्री को सौंपी जाती है या यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही बना रहता है। फिलहाल इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।















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