दुर्गापुर : पश्चिम बर्दवान जिले के दुर्गापुर-फरीदपुर (लौदोहा) क्षेत्र में एक सरकारी अधिकारी की तैनाती को लेकर शुक्रवार को राजनीतिक विवाद गहरा गया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जितेंद्र तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर प्रशासनिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उनके इस बयान के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में आरोप लगाया कि दुर्गापुर-फरीदपुर (लौदोहा) ब्लॉक में कार्यरत एक सहकारी निरीक्षक पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से उसी ब्लॉक में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी को एक ही स्थान पर इतने लंबे समय तक तैनात नहीं रहना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण अब तक नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 25 फरवरी 2026 को जारी एक आदेश, जिसमें कई अधिकारियों के स्थानांतरण की बात कही गई थी, उसमें उक्त अधिकारी का नाम शामिल नहीं था। भाजपा नेता ने इस पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि जब अन्य अधिकारियों के स्थानांतरण किए जा रहे हैं, तो इस मामले में अपवाद क्यों किया गया।
जितेंद्र तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी को एक राजनीतिक कार्यक्रम में देखा गया, जहां कथित रूप से किसी राजनीतिक दल के बैनर का उपयोग किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकारी अधिकारी खुले तौर पर किसी राजनीतिक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ दिखाई देता है, तो इससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संबंधित अधिकारी को चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। ऐसे में यदि उनके कार्यों को लेकर पहले से ही विवाद या राजनीतिक आरोप लग रहे हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर लोगों में शंका उत्पन्न हो सकती है।
भाजपा नेता ने अपने बयान में यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कार्य करना चाहिए, ताकि आम जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी इस मामले से जुड़ी विभिन्न जानकारियां एकत्र कर रही है। उनके अनुसार यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
इस बयान के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि चुनाव के नजदीक आते ही इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप अक्सर सामने आते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि यदि किसी अधिकारी की तैनाती या भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण से जुड़े निर्णय निर्धारित नियमों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर लिए जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी कार्य चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किए जाते हैं और इसमें पारदर्शिता बनाए रखने का पूरा प्रयास किया जाता है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारी या प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए इस प्रकार के मुद्दे आने वाले समय में और अधिक चर्चा का विषय बन सकते हैं। इस घटनाक्रम के बाद दुर्गापुर-फरीदपुर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को किस प्रकार देखता है और क्या इस विषय में आगे कोई औपचारिक जांच या कार्रवाई होती है।

















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