नई दिल्ली : देश की राजनीति में रविवार को हलचल तेज हो गई है, क्योंकि चुनाव आयोग आज शाम पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर सकता है। आयोग ने शाम चार बजे नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें चुनाव कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता की निगाहें भी इस घोषणा पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में हाल ही में आयोजित विशाल रैली और विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद चुनावी माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। इसी पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की संभावित घोषणा को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों का पूरा कार्यक्रम जारी किया जा सकता है।
इन पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल आगामी मई और जून महीने के बीच समाप्त होने वाला है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इसी कारण चुनाव आयोग निर्धारित समय से पहले मतदान और मतगणना की तिथियों का ऐलान करता है।
चुनाव आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई तक है। वहीं केरल विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त होने वाला है। तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई तक है, जबकि पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा हो जाएगा। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा का कार्यकाल 15 जून तक जारी रहेगा। इन सभी राज्यों में समय रहते चुनाव प्रक्रिया पूरी करना आयोग की जिम्मेदारी है।
सबसे अधिक राजनीतिक चर्चा पश्चिम बंगाल के चुनाव को लेकर हो रही है। सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य में मतदान कम चरणों में कराने की संभावना जताई जा रही है। पिछली बार जहां आठ चरणों में मतदान कराया गया था, वहीं इस बार दो या तीन चरणों में चुनाव कराए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
यदि पिछले विधानसभा चुनावों के परिणामों पर नजर डालें तो असम की 126 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान हुआ था। उस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की थी।
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों के लिए हुए चुनाव में आठ चरणों में मतदान कराया गया था। उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 215 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 77 सीटें मिली थीं। इसके बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता संभाली थी।
तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान कराया गया था। वहां द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने 133 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि अन्नाद्रमुक को 66 और भाजपा को 5 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद एम.के. स्टालिन मुख्यमंत्री बने थे।
केरल में 140 सीटों वाली विधानसभा के लिए भी एक चरण में चुनाव कराया गया था। वहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा ने 99 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को 41 सीटें मिली थीं। पिनराई विजयन ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला था।
पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए भी एक ही चरण में मतदान हुआ था। उस चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 16 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी, जबकि यूपीए गठबंधन को 9 सीटें मिली थीं। इसके बाद एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।
अब देशभर की राजनीतिक निगाहें चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा, इन राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाएगी और राजनीतिक दल अपने चुनावी अभियान को पूरी तरह गति दे देंगे। चुनावी तारीखों की घोषणा के साथ ही देश में एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का बड़ा अध्याय शुरू होने जा रहा है।

















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