आसनसोल : शनिवार को औद्योगिक नगरी आसनसोल में ईद का त्योहार पूरे उल्लास, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न इलाकों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर नमाज़ अदा की और आपसी प्रेम तथा भाईचारे का संदेश दिया।
शहर के ईदगाह हाई स्कूल परिसर में मुख्य नमाज़ का आयोजन किया गया, जहां हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। सुबह होते ही नमाज़ियों का हुजूम उमड़ पड़ा। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी नए परिधानों में सजे-धजे पहुंचे और पूरी श्रद्धा के साथ नमाज़ में शामिल हुए। नमाज़ के दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा और लोगों ने देश एवं समाज की खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
नमाज़ समाप्त होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई दी। हर चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया, जो अपने परिजनों और मित्रों के साथ इस पर्व का आनंद लेते नजर आए। लोगों ने अपने-अपने घरों में मेहमानों का स्वागत किया और पारंपरिक मिठाइयों व पकवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री मलय घटक भी कार्यक्रम में पहुंचे और नमाज़ियों को ईद की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ईद का पर्व हमें आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश देता है। समाज में इन मूल्यों को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अवसर समाज को जोड़ने का काम करते हैं और लोगों के बीच विश्वास को मजबूत बनाते हैं।
कार्यक्रम में वाशिमुल हक तथा अमरनाथ चटर्जी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर लोगों को पर्व की शुभकामनाएं दीं और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का आह्वान किया।
ईद के अवसर पर आसनसोल के बाजारों में भी खासा उत्साह देखा गया। सुबह से ही मिठाई की दुकानों, कपड़ों की दुकानों और अन्य बाजारों में लोगों की भीड़ उमड़ती रही। लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए खरीदारी करते नजर आए। पूरे शहर में उत्सव का रंग छाया रहा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ईद केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन सभी वर्गों के लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो इस वर्ष आसनसोल में ईद का पर्व शांति, सौहार्द और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि विविधताओं के बीच एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है, और ऐसे पर्व इस भावना को और मजबूत करते हैं।
















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