दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच दुर्गापुर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में रविवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब सरकारी संपत्तियों से राजनीतिक प्रचार सामग्री हटाने के दौरान चुनाव आयोग के कर्मियों पर कथित हमला किए जाने की घटना सामने आई। करंगोपाड़ा पोस्ट ऑफिस क्षेत्र में हुई इस घटना ने पूरे इलाके का माहौल गरमा दिया, जिसके बाद पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को तत्काल मोर्चा संभालना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत सरकारी भवनों और दीवारों से राजनीतिक दलों के प्रचार-प्रसार को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में दुर्गापुर महकमा कार्यालय के दो कर्मचारी—सूर्यकांत पाल और बिट्टू गुप्ता—रविवार को करंगोपाड़ा स्थित पोस्ट ऑफिस की दीवारों पर लिखे गए नारे और चित्रों को साफ करने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि दीवार पर तृणमूल कांग्रेस से संबंधित प्रचार सामग्री अंकित थी, जिसे हटाने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों कर्मचारी अपनी गाड़ी की ओर लौट रहे थे।
इसी दौरान अचानक कुछ स्थानीय लोग वहां इकट्ठा हो गए और स्थिति बिगड़ने लगी। आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने दोनों कर्मचारियों को वाहन से बाहर खींच लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की के साथ मारपीट की। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

घटना में घायल हुए कर्मचारी बिट्टू गुप्ता ने आरोप लगाया कि हमलावर खुद को तृणमूल कांग्रेस के समर्थक बता रहे थे और दीवार लेखन हटाने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे केवल चुनाव आयोग के आदेश का पालन कर रहे थे, इसके बावजूद उनके साथ हिंसक व्यवहार किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही कोकओवन थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया, जिन्होंने इलाके में गश्त शुरू कर दी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया।
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के जिला महासचिव अभिजीत दत्त ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग कर अवैध प्रचार किया था और जब उसे हटाया जा रहा था, तब उनके कार्यकर्ताओं ने हिंसक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता सोमनाथ दास ने कहा कि भाजपा अनावश्यक रूप से विवाद को बढ़ा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि मौके पर कुछ बहस जरूर हुई थी, लेकिन मारपीट के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता ही क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव के मद्देनजर पूरे राज्य में आचार संहिता लागू है और सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार को हटाने का अभियान जारी है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के विवाद से क्षेत्र की शांति भंग होती है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि आगे इस प्रकार की घटनाएं न हों और चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके।
















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