आसनसोल : रामनवमी के पावन अवसर पर पूरे प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम बर्धमान जिले में भी आस्था और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इसी क्रम में आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के फतेहपुर इलाके में शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

शोभायात्रा के दौरान “जय श्रीराम” के उद्घोष और भक्ति गीतों से पूरा इलाका गूंज उठा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु, हाथों में भगवा ध्वज और धार्मिक प्रतीक लिए जुलूस में शामिल हुए। पूरे मार्ग को सजाया गया था और विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की भी व्यवस्था की गई थी, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।
इस आयोजन में भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी Agnimitra Paul भी शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने शोभायात्रा को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया। जुलूस के दौरान अग्निमित्रा पाल श्रद्धालुओं के बीच सक्रिय नजर आईं और लोगों से संवाद करती दिखाई दीं।
विशेष रूप से यह देखा गया कि वह अपने हाथों में त्रिशूल धारण किए हुए शोभायात्रा में शामिल हुईं, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। समर्थकों ने इसे धार्मिक आस्था का प्रतीक बताया, वहीं कुछ राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

शोभायात्रा फतेहपुर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पूरे इलाके में धार्मिक वातावरण का संचार करती रही। जगह-जगह भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और अधिक बढ़ गया। आयोजन के दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि भीड़ के बीच किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई और जुलूस के मार्ग पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके चलते कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
रामनवमी के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी संदेश दिया। बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर इस पर्व को मनाते हुए दिखाई दिए, जिससे क्षेत्र में भाईचारे और सामूहिकता की भावना को बल मिला।
हालांकि, चुनावी माहौल के चलते इस प्रकार के आयोजनों में राजनीतिक दलों की सक्रियता भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। ऐसे में फतेहपुर की यह शोभायात्रा भी आस्था और राजनीति के मेल का एक उदाहरण बनकर सामने आई।














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