कोलकाता : महंगाई की मार से जूझ रहे लोगों के लिए बुधवार को एक और झटका सामने आया है। घरेलू रसोई गैस के बाद अब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम में 218 रुपये की वृद्धि ने कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर की गई है जब पहले ही बाजार में महंगाई को लेकर असंतोष का माहौल बना हुआ है। खास बात यह है कि महीने की शुरुआत में भी कमर्शियल गैस की कीमतों में वृद्धि की गई थी, और अब महीने के अंत से पहले ही फिर से दाम बढ़ने से व्यापारी वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है।
पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन समग्र रूप से वृद्धि का रुझान अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। अक्टूबर 2025 में जहां मामूली बढ़ोतरी हुई थी, वहीं जनवरी 2026 में कीमतों में 100 रुपये से अधिक की छलांग दर्ज की गई। फरवरी और मार्च में भी वृद्धि का सिलसिला जारी रहा, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता गया।
सिर्फ वाणिज्यिक गैस ही नहीं, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी हाल ही में इजाफा किया गया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 939 रुपये तक पहुंच गई है। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव के कारण हो रही है। तेल कंपनियां हर महीने इन वैश्विक कारकों के आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं, जिसके चलते कभी राहत मिलती है तो कभी उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ता है।
कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर होटल, ढाबा और रेस्तरां व्यवसाय पर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण उन्हें खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
इस बीच, महंगाई का यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि महंगाई पर नियंत्रण रखने में विफलता सामने आ रही है। वहीं, केंद्र की ओर से यह कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी अपरिहार्य है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बुधवार को सामने आई इस नई मूल्य वृद्धि ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए गैस की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों को इस बढ़ती महंगाई से कब और कितनी राहत मिल पाएगी। फिलहाल, लोगों को अपने घरेलू बजट और व्यवसायिक लागत के बीच संतुलन बनाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं, जो आने वाले समय में और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

















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