
कोलकाता : भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ा है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में कदम रखते ही देश को समर्पित एक भावुक संदेश भेजकर हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की लौ जगा दी। पहली बार किसी भारतीय ने वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन में भाग लेकर इतिहास रच दिया है।मिशन का नाम: एक्सिओम-4 मिशन,स्थान: अमेरिका का कैनेडी स्पेस सेंटर, वाहन: स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट I इस मिशन में भारत के सुभांशु शुक्ला के साथ अमेरिका की पेगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावसुज वोज्नान्स्की और हंगरी के तिबर कापू भी शामिल हैं। सुभांशु के इस अभियान ने न केवल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा दी है, बल्कि एक नई पीढ़ी के युवाओं को भी प्रेरित किया है।

अंतरिक्ष से पहला संदेश: भावुक और प्रेरक
जैसे ही मिशन सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा, सुभांशु ने भारतवासियों को संबोधित करते हुए कहा—“मेरे कंधे पर तिरंगा मुझे याद दिलाता है कि मैं अकेला नहीं हूं, पूरा भारत मेरे साथ है। यह सिर्फ मेरी यात्रा नहीं, भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत है।”इस संदेश के साथ ही देश भर में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ पड़ी। सोशल मीडिया से लेकर स्कूल-कॉलेजों और सेना के प्रतिष्ठानों तक हर जगह सुभांशु की वीरता का जश्न मनाया गया।

अंतरिक्ष में गूंजा स्वदेश का गीत
लॉन्च के दिन सुभांशु ने फिल्म ‘स्वदेश’ का गाना “यूँ ही चला चल” चुना था, जो आज उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक बन गया है। यह गीत न केवल उनके आत्मबल का प्रतीक बना, बल्कि उसमें छुपा संदेश भी स्पष्ट था— चलते रहो, बढ़ते रहो और देश के लिए कुछ बड़ा करो।
लखनऊ के स्कूल में जश्न और मां की आंखों में आंसू
लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, जहां से सुभांशु ने प्रारंभिक शिक्षा ली थी, वहां बुधवार को उत्सव का माहौल था। छात्रों ने देशभक्ति गीत गाए, शिक्षकों ने गर्व से कहा— “यह हमारे स्कूल का नहीं, देश का गौरव है।”
इस दौरान सुभांशु की मां भी स्कूल में उपस्थित थीं। भावुक होकर उन्होंने कहा—“डरने की कोई बात नहीं है। यह गर्व का क्षण है। मेरा बेटा भारत के लिए कुछ कर रहा है।”

1984 के बाद फिर एक भारतीय अंतरिक्ष में
सुभांशु शुक्ला की यह ऐतिहासिक उड़ान 1984 में राकेश शर्मा के बाद भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों में मील का पत्थर है। अंतर यह है कि इस बार यह मिशन वाणिज्यिक साझेदारी के साथ पूरा हुआ है, जो भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सशक्त करेगा।

भारत के अंतरिक्ष अभियान को नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन की सफलता के बाद भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान—गगनयान को भी नई प्रेरणा मिलेगी। वाणिज्यिक क्षेत्र की सक्रियता से अंतरिक्ष अनुसंधान को नया बल मिलेगा और देश आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेज़ी से अग्रसर होगा। जय हिंद, जय विज्ञान!














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