दुर्गापुर : इस्पात नगरी दुर्गापुर के विधाननगर इलाके में शनिवार देर रात एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की चौथी मंजिल से गिरकर ठेका मजदूर की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और आक्रोशित परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने कॉलेज गेट को अवरुद्ध कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिए बिना वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
मृतक की पहचान शेख हैदर अली (25) के रूप में हुई है। वह बर्दवान जिले के बुदबुद थाना अंतर्गत देवशाला ग्राम पंचायत के काँकोरा गांव का निवासी था। परिजनों के अनुसार, हैदर अली 8 अगस्त को कॉलेज भवन निर्माण कार्य में राजमिस्त्री के सहायक के रूप में काम कर रहा था। उसी दौरान अचानक वह चौथी मंजिल से नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। तत्काल उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार रात उसकी मौत हो गई।
हादसे के बाद मृतक के परिवार और रिश्तेदारों ने कॉलेज प्रशासन एवं ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि हादसे के बाद न तो प्रशासन ने और न ही ठेकेदार ने परिवार से संपर्क किया, न ही किसी प्रकार की आर्थिक मदद या मुआवजे की घोषणा की गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई भी उचित व्यवस्था कॉलेज परिसर में नहीं की गई थी, जिसके चलते यह दुर्घटना हुई।
मृतक की मां और अन्य रिश्तेदारों का कहना था कि उनका बेटा अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज प्रशासन और ठेकेदार जल्द ही मुआवजे की घोषणा नहीं करते, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और जिला स्तर तक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
घटना की जानकारी मिलते ही न्यू टाउनशिप थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन आक्रोशित लोगों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास जारी है।
इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। निर्माण कार्य में लगे ठेका मजदूरों के प्रति उदासीन रवैया और उनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मजदूरों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए गए होते तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
फिलहाल मृतक के परिजनों को इंसाफ और मुआवजे की प्रतीक्षा है, जबकि प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।


















Users Today : 1
Users Yesterday : 30