आसनसोल : सोमवार को चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (सीएलडब्ल्यू) ने ऐसा इतिहास रचा, जो अब तक कभी संभव नहीं हो पाया था। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के महज 115 कार्यदिवसों में 300 विद्युत रेल इंजनों का उत्पादन पूरा कर कारखाने ने नई मिसाल कायम की। 14 अगस्त को 300वें इंजन के औपचारिक शुभारंभ के साथ ही यह उपलब्धि दर्ज की गई।
सीएलडब्ल्यू के महाप्रबंधक विजय कुमार ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार 33 दिन कम समय में यह लक्ष्य हासिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता कर्मचारियों की उच्च दक्षता और निरंतर मेहनत का परिणाम है। इस अवसर पर उन्होंने पूरी टीम को बधाई दी और आगे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई।
कारखाने के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, वास्तव में इस अवधि में 302 इंजन बनाए गए हैं। इनमें से 228 इंजन चित्तरंजन इकाई में और 74 इंजन दानकुनी इकाई में तैयार किए गए। यह संख्या कारखाने की उत्पादन क्षमता और संगठनात्मक दक्षता का परिचायक है।
रेलवे बोर्ड ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में सीएलडब्ल्यू को कुल 777 विद्युत रेल इंजनों के उत्पादन का लक्ष्य दिया है। अधिकारियों का कहना है कि कारखाना इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विशेष बात यह भी है कि वित्तीय वर्ष के शुरुआती 41 कार्यदिवसों में ही पहले 100 इंजन तैयार कर लिए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बरकरार रही तो सीएलडब्ल्यू न केवल अपने तय लक्ष्य तक पहुंचेगा बल्कि एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान भी स्थापित कर सकता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समय पर उत्पादन से रेलवे नेटवर्क में आधुनिक इंजनों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे यात्रियों और माल परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आएगा।
सोमवार को हासिल इस उपलब्धि ने सीएलडब्ल्यू की पहचान को और मजबूत किया। यह न केवल कर्मचारियों की मेहनत और तकनीकी कौशल का प्रमाण है, बल्कि देश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

















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