
आसनसोल : शनिवार को सालनपुर ब्लॉक के पिठाक्यारी ग्रामीण अस्पताल से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई। यहां एक गंभीर अवस्था में आए मरीज का पैर काटने की नौबत टल गई और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट सका। इस असंभव को संभव बनाने का श्रेय अस्पताल के बीएमओएच डॉ. बिनॉय रॉय को जाता है।
कीड़े लगे घाव से जूझ रहा था मरीज
जानकारी के अनुसार, मुकेश बाउरी (35) नामक युवक तीन सप्ताह पहले गंभीर घाव के साथ पिठाक्यारी अस्पताल पहुंचा था। उसके पैर में सूजन थी, घाव इतना बिगड़ चुका था कि उसमें से कीड़े निकल रहे थे। सामान्य स्थिति में ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है, लेकिन डॉ. रॉय ने जोखिम उठाकर उसे अपनी देखरेख में भर्ती किया।

ईमानदार प्रयास से बचा अंग
डॉ. रॉय ने मरीज को लगातार दवाइयां, ड्रेसिंग और गहन उपचार दिया। धीरे-धीरे घाव भरने लगा और तीन सप्ताह बाद पूरी तरह से ठीक हो गया। अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों ने इसे एक बड़ी उपलब्धि माना। डॉ. रॉय ने कहा, “अगर मुकेश कुछ दिन और देर से आता तो पैर काटना अनिवार्य हो जाता। सीमित संसाधनों के बावजूद यह सफलता हमारे ईमानदार प्रयास का परिणाम है।”

ग्रामीण अस्पताल में बड़ी सफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर का उपचार आमतौर पर बड़े अस्पतालों में ही संभव होता है, लेकिन ग्रामीण अस्पताल में इसका होना उल्लेखनीय है। यह न केवल चिकित्सा कर्मियों की प्रतिबद्धता दिखाता है बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता भी उजागर करता है।
स्थानीय लोगों में खुशी
मुकेश के घर लौटने की खबर से स्थानीय लोगों में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने कहा कि पिठाक्यारी अस्पताल ने यह साबित किया है कि अगर डॉक्टर ईमानदारी और लगन से काम करें तो छोटे अस्पताल भी बड़े चमत्कार कर सकते हैं।














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